भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में चार दोषियों को 3-3 वर्ष की सजा

भोपाल। जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक में पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी करने के मामले में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) भोपाल ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 29 जून 2026 को विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक श्रीमती हेमलता कुशवाह ने बताया कि विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा, प्रबंधक एवं सहकारिता निरीक्षक विनोद कुमार देवल, सहकारिता निरीक्षक ए.पी.एस. कुशवाह तथा क्रेता परमजीत बैदी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 एवं 120-बी के तहत दोषी पाते हुए प्रत्येक को तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹1,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया।
इसके अलावा विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा, विनोद कुमार देवल और ए.पी.एस. कुशवाह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत भी प्रत्येक धारा में तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹1,000-₹1,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। शासन की ओर से मामले की पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती हेमलता कुशवाह ने की।
अभियोजन के अनुसार, भोपाल जिले के ग्राम पड़रिया जार निवासी किसान हरि सिंह ने कृषि भूमि गिरवी रखकर पंप एवं थ्रेशर खरीदने के लिए ₹18,000 का ऋण लिया था। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत किसान की लगभग पांच एकड़ कृषि भूमि को 16 फरवरी 2002 को मात्र ₹40,000 में परमजीत बैदी के नाम नीलाम कर दिया, जबकि भूमि का बाजार मूल्य और कलेक्टर द्वारा निर्धारित मूल्य इससे कहीं अधिक था।
जांच में सामने आया कि नीलामी प्रक्रिया के नियमों का उल्लंघन करते हुए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और नीलामी की पुष्टि के लिए संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं, भोपाल को भेजे गए। अभियोजन के अनुसार इसी प्रकार की साजिश के तहत कुल 23 भूमि के टुकड़े भी परमजीत बैदी के नाम नीलाम कराए गए।
लोकायुक्त पुलिस द्वारा जांच के बाद मामला दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।




