धारदार हथियार से मारकर हत्या कारित करने वाले आरोपी को हुआ आजीवन कारावास

इंदौर – जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री संजीव श्रीवास्तव, ने बताया कि दिनांक 30.06.2023 को माननीय न्यायालय – चतुर्थ अपर सत्र न्यायालय, श्रीमान् जयदीप सिंह, इन्दौर (मध्य प्रदेश), ने थाना एरोड्रम, इन्दौर, जिला इन्दौर के अपराध क्रमांक 274/2020 में निर्णय पारित करते हुए आरोपी देवेन्द्र उर्फ भय्यू प्रजापत, उम्र 33 वर्ष, निवासी – इंदौर को धारा 302 भा.दं.वि. में आजीवन कारावास तथा धारा 25(1-बी) सहपठित धारा 4 आयुध अधिनियम में 1 वर्ष का सश्रम कारावास व कुल 1500/- रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया। प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक श्री हेमन्त राठौर द्वारा की गई।
घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 22.05. 2020 को अरविंदो अस्पताल, इंदौर से थाना एरोड्रम पर सूचना दी कि, जिस पर से आरक्षी केन्द्र एरोड्रम पर मर्ग क्र. 25/2020 धारा 174 जा.फौ. पंजीबद्ध किया गया। बाद में थाने पर आकर चक्षुदर्शी साक्षी राहुल अग्रवाल के कथन लेखबद्ध किये गए तथा उसके न्यायालय में धारा 164 दं.प्र.सं. के न्यायालयीन कथन करवाये गए, जिसमें उसने बताया कि आरोपी देवेन्द्र उर्फ भय्यु प्रजापत द्वारा मृतक सावन सोनी को पैसों की बात को लेकर धारदार गुप्ती से वार करके चोटें पहुंचाई गई, जिस कारण से उसकी जांघ से अत्यधिक रक्त स्त्राव होने के कारण उसकी मृत्यु हो गई, उसके बाद मैं उसे अरबिंदो अस्पयताल लेकर गया था उक्त सूचना पर से आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 274/2020 अंतर्गत धारा 302 भा.दं.सं. के अंतर्गत प्रथम सूचना प्रतिवेदन पंजीबद्ध किया गया, संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अन्वेषण के दौरान घटना के तुरंत बाद अन्वेषण अधिकारी अशोक पाटीदार ने घटना के चक्षुदर्शी साक्षी के धारा 164 दं.प्र.सं. के न्यायालयीन कथन करवाये गए थे। विवेचना पश्चात् विचारण के दौरान घटना के चक्षुदर्शी साक्षी मृतक सावन के मित्र अपने न्यायालय में कथन के दौरान अपने पुलिस को दिये कथनों एवं न्यायालयीन कथन से पलट गये केवल एकमात्र साक्षी ने न्यामयालय में बयान देते समय घटना का समर्थन किया था, किन्तु किसी कारणवश साक्षी का उस दिन प्रतिपरीक्षण नहीं हो पाया था और उक्त साक्षी आगामी पेशी पर अपने न्यायालय में दिये कथनों से पलट गया था उसके बावजूद भी न्यायालय ने पूर्व में साक्षी के पूर्व में दिये गए कथनों एवं अन्य अभियोजन साक्षियों के कथनों पर विश्वास करते हुये अभियुक्त को दोषी मानते हुये दण्डित किया गया, जिस पर से अभियुक्त को उक्त दण्ड से दण्डित किया।




