प्रमोशन में आरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त: स्टडी और सर्वे का डेटा प्रतिवादियों को देने के निर्देश
जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा— क्वांटिफिएबल डेटा गोपनीय नहीं, 17 जुलाई तक आपत्ति दाखिल करें; अगली सुनवाई 21 जुलाई को

जबलपुर। मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पदोन्नति से संबंधित क्वांटिफिएबल डेटा (स्टडी एवं सर्वे रिपोर्ट) प्रतिवादियों को उपलब्ध कराया जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह डेटा ऐसा गोपनीय दस्तावेज नहीं है जिसे साझा न किया जा सके।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने आदेश दिया कि प्रतिवादी डेटा का अध्ययन कर 17 जुलाई तक अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
यह मामला भोपाल निवासी स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि पहले महाधिवक्ता ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया था कि नए नियमों के तहत पदोन्नति नहीं दी जाएगी, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने कर्मचारियों की पदोन्नति सूची जारी कर दी।
सुनवाई में यह भी बताया गया कि महाधिवक्ता का मौखिक आश्वासन न्यायालय के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है। इस दौरान अदालत ने पाया कि सरकार ने पहले पदोन्नति नियम-2025 के नियम-5 के तहत कराई गई स्टडी और सर्वे का डेटा सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किया था।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि स्टडी और सर्वे से संबंधित डेटा प्रतिवादियों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे उसके आधार पर अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकें। इसके बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैधनाथन, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज शर्मा तथा आपत्तिकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद अली उपस्थित रहे।




