सीधी

₹2 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए पंचायत सचिव को 5 साल की सजा

ar 728 ad
AR News Live

सीधी। इंदिरा आवास योजना की दूसरी किस्त जारी कराने के बदले ₹2 हजार की रिश्वत लेना ग्राम पंचायत सचिव को भारी पड़ गया। करीब नौ साल पुराने रिश्वत मामले में सीधी के विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने आरोपी सचिव कन्हैयालाल उर्फ कन्हई साकेत को दोषी ठहराते हुए दो अलग-अलग धाराओं में 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल ₹20 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

मामला वर्ष 2017 का है। शिकायतकर्ता इंदल बसोर की मां सोनिया बसोर के नाम से वर्ष 2014 में इंदिरा आवास योजना के तहत मकान निर्माण के लिए ₹70 हजार स्वीकृत हुए थे। पहली किस्त ₹35 हजार मिलने के बाद उनकी मां की मृत्यु हो गई थी। मकान की दूसरी किस्त भी ₹35 हजार थी, जिसे निकलवाने के लिए शिकायतकर्ता ने ग्राम पंचायत नौंगवां के तत्कालीन सचिव कन्हैयालाल साकेत से संपर्क किया।

आरोप था कि सचिव ने दूसरी किस्त जारी कराने के बदले पहले ₹5 हजार की रिश्वत मांगी। बाद में सौदा ₹4 हजार में तय हुआ और शिकायतकर्ता ने मजबूरी में ₹2 हजार दे दिए। शेष ₹2 हजार देते समय शिकायतकर्ता ने सचिव को रिश्वत लेते पकड़वाने के लिए लोकायुक्त रीवा में 15 दिसंबर 2017 को शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त की टीम ने 19 दिसंबर 2017 को सेमरिया बाजार स्थित हनुमान मंदिर के पास कार्रवाई की। इस दौरान सचिव कन्हैयालाल उर्फ कन्हई साकेत को ₹2 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।

जांच पूरी होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में अभियोग पत्र विशेष न्यायालय में पेश किया गया। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अंजू पाण्डेय ने पैरवी की।

अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड, जबकि धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत भी 5 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं चुकाने पर दोनों मामलों में अतिरिक्त सश्रम कारावास का प्रावधान भी किया गया है।


AR News Live
ar 728 ad
ar 728 ad

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ar 728 ad
Back to top button