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सीधी जिले में इस समय गली गली चल रहा मेडिकल नशे का व्यापार, नशेड़ियों का बना गढ़ ?

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सीधी जिले में इस समय गली गली चल रहा मेडिकल नशे का व्यापार, नशेड़ियों का बना गढ़ ?

 

*क्या प्रशासन के लिए मेडिकल नशे का कारोबार रोकने की सबसे बड़ी है चुनौती ?*

 

*रोड के चप्पे चप्पे पर मेडिकल नशा का व्यापार करने वाले रहते हैं मौजूद?*

 

*सीधी जिले के चप्पे-चप्पे पर बैठे हैं मेडिकल नशे का कारोबार करने वाले माफिया?*

 

*सूत्रों के हवाले से खबर है कि कई ऑटो चालक भी मेडिकल नशे के हैं शिकार?*

 

*क्या सीधी जिले में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट की मुख्य वजह मेडिकल नशा है?*

*रिपोर्ट*👉 अरुण मिश्रा

सीधी l जिले के किसी भी सामुदायिक शौचालय के आसपास, अस्पताल के आसपास, गोपाल दास बंधे के आसपास या फिर सीधी का नया बस स्टैंड हो या पुराना बस स्टैंड कोई भी ऐसा कोना नहीं है जहां पर कोरेक्स की सीसी, स्पास्मो कैप्सूल या फिर एल्प्राज़ोलम टेबलेट के खाली पत्ते हर जगह मौज़ूद मिलते हैं। आखिर कहाँ से आते हैं ये खाली पत्ते? जब बिना डाॅक्टर की पर्ची के अलावा नहीं मिल सकता तो फिर कैसे गली चौराहे मोहल्ले में खाली रैपर पड़े हुए मिलते हैं।

 

बता दें कि अभी हाल ही में सबसे बड़ा सबूत अभी तत्काल में तीन-चार दिन पहले सीधी के नए बस स्टैंड में शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पाण्डेय जी के द्वारा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में मेडिकल नशे से संबंधित सोशल मीडिया में डालकर प्रशासन को अवगत कराने की कोशिश की गई थी।

 

जैसा कि आप सभी को पता ही है कि पूरे प्रदेश में नशा मुक्ति अभियान का प्रशासन दावा करती है लेकिन उसके बावजूद भी मेडिकल नशे का कारोबार धड़ल्ले के साथ चल रहा है। यदि सीधी जिले में एक स्पेशल टीम गठित की जाए और मेडिकल नशे की हालत में जो शख्स पाए जाते हैं उनको तत्काल पुलिस अगर पूछताछ करे कि यह कैप्सूल या टेबलेट कहां से मिलती है तो बड़े से बड़े ठिकाने और इस कारोबार के जड़ तक पहुंचा जा सकता है। हो सकता है इसमे कुछ मेडिकल स्टोर के साथ-साथ कई मेडिकल एजेंसी भी शामिल हों।

 

बता दें कि सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ सीधी जिले का हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी प्रियदर्शिनी नगर जमोड़ी के आसपास एक से एक बढ़कर मेडिकल नशे के कारोबारी मौजूद रहते हैं जिसके कारण स्कूल से लेकर कॉलेज तक के स्टूडेंट प्रभावित होते हैं। वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो आए दिन मेडिकल नशे में कई युवा एक्सीडेंट के शिकार होते रोज नज़र आते हैं। और साथ ही जिले में कई प्रकार की अपराधिक घटनाएं घटित होती हैं जिसमें से सबसे ज्यादा युवा जितने भी आपराधिक प्रवृत्ति के हैं वह कहीं ना कहीं मेडिकल नशे से ग्रस्त हैं।

 

बता दें कि अभी हाल ही में उनके बताए के अनुसार प्रियांशी विचारधारा न्यूज़ पेपर के सीधी जिले के ब्यूरो चीफ़ अभिषेक कुमार पाण्डेय जी के पास एक धमकी भरा फोन आया। जो फोन पर अपना नाम राजभान यादव निवासी हवाई पट्टी अपने आप को बता रहा था साथ ही उन्होंने यह भी कहा जिसकी शिकायत जमोड़ी थाने में लिखित तौर पर की गई है अब देखना यह है की इस बात को लेकर जमोड़ी थाना कितना सीरियस होता है और पुलिस प्रशासन इसमें क्या कार्यवाही करती है। आखिर इतने बड़े नशा कारोबारी कौन हैं जिनका हाथ इनके सर पर है। और जो पुलिस और पत्रकार एक दूसरे के पहलू हैं ऐसी कौन माफिया हैं जिनके हाथ उनके सर पर है जो खुलेआम मोबाइल पर धमकी भरा फोन और गाली गलौज करते हैं। प्रशासन को अवगत कराना चाहता हूं यदि पत्रकार के साथ किसी प्रकार की कोई जान-माल की घटना घटित होती है तो उसका ज़िम्मेदार वही शख्स माना जाएगा। यदि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहा तो आम आदमी कैसे उम्मीद कर सकता है कि हम सुरक्षित हैं। सीधी जिला प्रशासन से हमारी अपील है कि चाहे जिले में कोई भी पत्रकार हो यदि उसके फोन पर कोई गाली गलौज करे या धमकी भरा फोन आता है तो उस नंबर के खिलाफ़ और उस शख्स के खिलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए जिससे इन माफ़ियाओं पर शिकंजा कसा जाना चाहिए।


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