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बच्चों में बढ़ रहा है कोरोना वायरस का संक्रमण, डॉक्टर से जानें- इसके लक्षण और क्या हो सकते हैं एहतियाती कदम

देश में कोविड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसी बीच लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश कुमार ने सलाह दी कि कोरोना के बचाव से जुड़े नियमों का पालन करें.

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देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. पिछले 24 घंटे में कोविड संक्रमण के 10,158 नए मामले सामने आए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार (13 अप्रैल) की सुबह जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में पॉजिटिविटी दैनिक दर 4.42 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 4.02 प्रतिशत है.

 

देश में एक्टिव मरीजों की संख्या 44 हजार 998 है, जो कुल मामलों का 0.10 फीसदी है. मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.71 प्रतिशत है. स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि कोविड से निपटने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम और वेंटिलेटर है. कोविड वॉर्डों को ऑक्सीजन से जोड़ा गया है. लोक नायक जय प्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉक्टर सुरेश कुमार से एबीपी न्यूज ने बच्चों में बढ़ते कोरोना को लेकर बातचीत की.

 

डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि दिल्ली में 7-8 महीने के बाद पहले बार इतने केस सामने आए हैं. हमारे यहां 20 मरीज़ कोविड के भती हैं, जिसमें से 4 बच्चे हैं. ज्यादातर बच्चों को बुखार के साथ गला खराब होने की शिकायत है. दो बच्चों को वायरल कोविड निमोनिया, एक बच्चे को उल्टी और दस्त है. एक बच्चा तो सिर्फ 18 दिन का है.

 

कोविड निमोनिया क्या है?  

 

डॉक्टर सुरेश ने कहा कि निमोनिया कई तरह के होते हैं. बैक्टीरियल निमोनिया जल्दी ठीक हो जाता है. कोविड निमोनिया वायरस की वजह से है. इस कारण ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. इन केस में पीडियाट्रिक आईसीयू की जरूरत भी पड़ जाती है. ब्लड प्रेशर भी कोविड निमोनिया की वजह से कम हो जाता है.

 

बच्चों की क्या स्थिति है? 

 

डॉक्टर सुरेश ने कहा कि अभी हमने कोविड निमोनिया संक्रमित बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा है और उनकी स्थिति स्थिर है, अब तक एक भी बच्चे की कोविड के कारण मृत्यु नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि इस बार भर्ती हो रहे ज्यादातर बच्चों के गले में तकलीफ है. इस बार कई बच्चे आंखों में तकलीफ जैसी परेशानी लेकर भी आ रहे हैं, जो कि पहले की कोविड लहर में नहीं थी.

 

बच्चों में संक्रमण दर बढ़ने का कारण क्या है? 

 

डॉक्टर सुरेश ने बच्चों को पूर्ण रूप से वैक्सीन नहीं दी गई है इसलिए बच्चों में संक्रमण बढ़ रहा है. उन्होंने लक्षण बताते हुए कहा कि अगर गला खराब है, पेट में दर्द है, उल्टी – दस्त है या आंखों में जलन है तो ऐसे बच्चों का तुरंत कोरोनावायरस टेस्ट कराना चाहिए. उन्होंने बच्चों को ठीक होने में करीब 5-7 दिन का समय लग रहा है. जिन बच्चों को अस्थमा है, उन्हें ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा है.


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