खेती को बनाएं लाभ का व्यवसाय, किसानों को लाभकारी फसलों के लिए करें प्रेरित: कृषि उत्पादन आयुक्त

सीधी। कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता ने रीवा एवं शहडोल संभाग के कृषि एवं संबद्ध विभागों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को किसानों की आय बढ़ाने के लिए परिणाम आधारित कार्ययोजना अपनाने के निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि किसान की समृद्धि ही प्रदेश की समृद्धि का आधार है और खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए फसल विविधीकरण एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को परंपरागत फसलों के साथ दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जाए। विशेष रूप से अरहर की खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए बताया कि पूसा-16 किस्म कम लागत में कम समय में तैयार हो जाती है और इससे किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है।
बैठक में प्रत्येक जिले में कृषि एवं उद्यानिकी की विशिष्ट फसलों के क्लस्टर विकसित करने, फल, सब्जी, मसाला एवं फूलों की खेती को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक खेती करने वाले किसानों को रोल मॉडल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि खेती के साथ उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन को जोड़कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने फार्मर रजिस्ट्री, किसान सम्मान निधि और एग्रीस्टैक के अंतर्गत ई-केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने तथा उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र गिरदावरी में दर्ज करने के निर्देश भी दिए। साथ ही उर्वरकों का वितरण केवल ई-विकास प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित करने और सहकारी बैंकों की ऋण वसूली की नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया।
नरवाई प्रबंधन की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि बायो एनर्जी प्लांट फसल अवशेषों का उपयोग करेंगे और किसानों से पराली एवं अन्य अवशेष निर्धारित दर पर खरीदे जाएंगे। इसके लिए बेलर मशीन, सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।
बैठक में मत्स्य पालन और कृषि प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेश एवं संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को आगामी दो वर्षों में मत्स्य उत्पादन दोगुना करने के लक्ष्य के साथ केज कल्चर और बायोफ्लॉक तकनीक को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। बाणसागर बांध सहित जलभराव वाले क्षेत्रों में मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव ने पशुधन विकास, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्तायुक्त चारा उत्पादन, कृत्रिम गर्भाधान तथा क्षीरधारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक विकासखंड में साइलेज प्लांट स्थापित करने और पशुपालन विभाग की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
एनआईसी कक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर विकास मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह सोलंकी तथा कृषि एवं संबद्ध विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।




