पद का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी, बैंक अधिकारियों को हुई तीन साल की जेल

भोपाल: जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक के अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गंभीर मामले में आज दिनांक 06 दिसंबर 2024 को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के माननीय न्यायाधीश श्री मनोज कुमार सिंह ने फैसला सुनाया।
आरोपी विक्रय अधिकारी विजेंद्र कौशल, संयुक्त पंजीयक अशोक कुमार मिश्रा, सहकारिता निरीक्षक ए.पी.एस. कुशवाहा, किरण अग्रवाल और कोमल लोल्ला को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13-1(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत दोषी पाया गया।
सजा का विवरण:
1. धारा 420 और 120-बी भादवि: 03 वर्ष का सश्रम कारावास और 2,000 रुपये का अर्थदंड।
2. धारा 467, 471, 120-बी भादवि और धारा 13-1(डी) सहपठित 13(2) पीसी एक्ट: प्रत्येक धारा में 03-03 वर्ष का सश्रम कारावास और 8,000 रुपये का अर्थदंड।
इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती हेमलता कुशवाहा ने पैरवी की।
घटना का संक्षिप्त विवरण:
ग्राम बगौनिया, कल्याणपुर के ग्रामीणों ने लोकायुक्त कार्यालय को शिकायत दी थी कि बैंक अधिकारियों ने ग्राम बरखेड़ा नाथू रातीबड़ में ऋण वसूली के दौरान बैंक अधिनियम 1999 के प्रावधानों का उल्लंघन किया। आरोप था कि कृषि भूमि की नीलामी बिना उचित प्रक्रिया के, बाजार मूल्य से बेहद कम दाम पर की गई।
मामले का प्रमुख बिंदु:
– 1995 में कृषक अशोक कुमार शर्मा ने मोटर और पंप के लिए 29,000 रुपये का ऋण लिया था।
– 2007 में उनकी 4.92 एकड़ कृषि भूमि को मात्र 1,50,000 रुपये में षड्यंत्रपूर्वक नीलाम कर दिया गया।
– नीलामी में नियमों का उल्लंघन करते हुए बंधक भूमि को कृषक को सूचना दिए बिना बेहद कम मूल्य पर बेचा गया।
– नीलामी से संबंधित नोटशीट में कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और संयुक्त पंजीयक से अवैधानिक पुष्टि करवाई गई।
न्यायालय का निर्णय:
अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और तर्कों को माननीय न्यायालय ने स्वीकार किया और सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए दंडित किया।
अभियोजन का संदेश:
यह निर्णय भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है और यह संदेश देता है कि पद का दुरुपयोग करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।




