धान उपार्जन केन्द्रों में हो रहा जमकर भ्रष्टाचार अधिकारी कर रहे अनदेखी।

धान उपार्जन केन्द्रों में हो रहा जमकर भ्रष्टाचार अधिकारी कर रहे अनदेखी।
*हटवा चितांग धान उपार्जन केंद्र का मामला आया सामने। समित सेवक रहते हैं नदारत कंप्यूटर ऑपरेटर बना समिति प्रबंधक मनमानी ढंग से हो रही खरीदी।किसान रहते हैं परेशान।*
*धन उपार्जन केन्द्रों में रहता है शराबियों का डेरा, महिला लेबरों सहित मीडिया कर्मियों को बकते हैं गली। समित सेवक अनुपस्थित।।*
धान उपार्जन केन्द्र करें तो ऐसा ही मामला। धान उपार्जन केंद्र शहजी का भी सामने आया है। समित प्रबंधक के गुणवत्ताहीन कार्यों से परेशान हैं किसान, कहीं नहीं हो रही सुनवाई।
यह है पूरा मामला:*
इन दिनों पूरे प्रदेश में धान की खरीदी हो रही है सरकार के द्वारा हर क्षेत्र में धान खरीदी केंद्र बनाये गये हैं जहां पर किसान अपनी धान को लेकर केंद्र में पहुंचकर धान की बिक्री करते हैं।
सरकार के द्वारा एक निश्चित माप- तौल की अवधि निश्चित किया गया है जहां एक बोरे में शुद्ध वजन 40 किलोग्राम निश्चित किया गया है ।लेकिन वहीं पर धान उपार्जन केंद्र के संचालकों द्वारा मनमानी तरीके से किसानों से 41 किलो ग्राम वजन धान की भर्ती करवाते हैं जहां अगर देखा जाए तो प्रत्येक किसानों को काफी घाटे का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही मामला सीधी जिले के विधानसभा सिहावल क्षेत्र के चितांग उपार्जन केंद्र का प्रकाश में आया है जहां पर मीडियाकर्मियों के द्वारा जब उपार्जन केंद्र में पहुंचकर किसानों से जब बात किया गया तो उनके द्वारा यह जानकारी देते हुए बताया गया कि सभी किसान 41 किलो ही भरते हैं। आखिर इसमें गलती किसकी मानी जाए क्योंकि? यदि प्रबंधक के द्वारा या वहां पर उपस्थित कर्मचारियों के द्वारा जानकारी किसानों को दिया गया होता तो किसान उचित माप में भरते या मजदूरों से भरवाते। लेकिन कहीं ना कहीं वहां पर कर्मचारियों की लापरवाही मानी जा सकती है अब ऐसे में सवाल तो यह उठता है कि वरिष्ठ अधिकारीयों के द्वारा जांच नहीं की जाती होगी कारण यही है कि मनमानी तरीके से किसानों को चूना लगाया जा रहा है। यह किसी एक जगह का मामला नहीं है ऐसे मामले हर जगह देखने को मिल रहे हैं। कहीं ना कहीं इसमें अधिकारियों का भी संरक्षण माना जा सकता है। यदि अधिकारियों के द्वारा उचित समय पर जांच कर लिया जाए या करा लिया जाए तो यह स्थिति ही नहीं आये।
गौरतलब बात यह है कि खबर प्रकाशन के बाद अधिकारियों के द्वारा जांच कराई जाती है या नहीं कराई जाती यह तो देखने वाली बात होगी।




