नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर व्यपहरण कर ले जाकर उसके साथ दुष्कृत्य करने वाले आरोपी को हुआ 20 वर्ष का सश्रम कारावास

नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर व्यपहरण कर ले जाकर उसके साथ दुष्कृत्य करने वाले आरोपी को हुआ 20 वर्ष का सश्रम कारावास
इंदौर – जिला अभियोजन अधिकारी श्री संजीव श्रीवास्तव, ने बताया कि दिनांक 20.06.2024 को माननीय न्यायालय – तेरहवें अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) इंदौर] श्रीमती सुरेखा मिश्रा, ने थाना द्वारिकापुरी, इन्दौर के अपराध क्रमांक 381/2020, सत्र प्रकरण क्रमांक 263/2020 में निर्णय पारित करते हुए अभियुक्त राकेश, उम्र 26 वर्ष, निवासी- इंदौर को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376(3) व पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एल)/6 में 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास तथा धारा 366 भा.दं.सं. में 7 वर्ष का सश्रम कारावास और धारा 344 भा.दं.सं. में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल 6000/- रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। प्रकरण में जिला लोक अभियोजन अधिकारी, जिला इंदौर के निर्देशन में अभियोजन की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती सुशीला राठौर द्वारा की गयी।
नोट :- माननीय न्यायालय द्वारा पीडि़त बालिका को 40,000/- रुपये की राशि प्रतिकर के रूप में दिलाये जाने की अनुशंसा की गई।
अभियोजन मामले के अनुसार सूचनाकर्ता/बालिका की माता ने दिनांक 31.07.2020 को पुलिस थाना द्वारकापुरी, जिला इंदौर में रिपोर्ट दर्ज करायी कि उसकी लड़की/बालिका जिसकी जन्म दिनांक 27.01.2005 है, दिनांक 31.07.2020 को सुबह करीब 06:30 बजे घर से काम पर जाने का बोलकर गयी थी, जिसकी वापस नहीं आने पर वह उसे तलाश करने के लिये गई तो उसे पता चला कि बालिका आज काम पर नहीं आई है। तत्पश्चात् उसने लड़की/बालिका की तलाश आसपास कॉलोनियों, नाते-रिश्तेदारों में की, किन्तु कोई पता नहीं चला। उसे शंका है कि कोई अज्ञात बदमाश उसकी नाबालिग लड़की/बालिका को बहला-फुसलाकर ले गया है। बालिका की माता की रिपोर्ट पर पुलिस थाना द्वारिकापुरी, जिला इंदौर में गुम इंसान क्रमांक 87/2020 दर्ज कर अपराध क्रमांक 381/2020 अंतर्गत धारा 363 भा.दं.सं. की प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध की गई व मामला विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान बालिका को दस्तयाब किया गया, जिसमें उसने बताया कि आरोपी उसे बहला-फुसलाकर ले गया था, बालिका के मेडिकल परीक्षण उपरांत अन्य साक्ष्य एकत्रित कर प्रकरण में धारा 363, 366, 376(2)(एन), 376(3) भा.दं.सं. एवं धारा 5(एल)/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के अंतर्गत अभियोग पत्र अभियुक्त के विरुद्ध माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिस पर से अभियुक्त को उक्त दंड से दंडित किया गया।




