‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान को मिला जनसमर्थन, सीधी पुलिस ने जिलेभर में चलाया सघन साइबर जागरूकता अभियान

सीधी। प्रदेशव्यापी ‘सेफ क्लिक 2.0’ साइबर जागरूकता अभियान के तहत शनिवार को जिला सीधी पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना एवं चौकी क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया। विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों को साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए गए।
पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी (आईपीएस) के मार्गदर्शन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी तथा सभी एसडीओपी के पर्यवेक्षण में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए तरीकों से सतर्क करना और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक बनाना रहा।
कोतवाली थाना पुलिस ने रमाबलदेव पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में नागरिकों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया फ्रॉड, यूपीआई धोखाधड़ी तथा साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के उपयोग के बारे में भी बताया गया।
रामपुर नैकिन थाना पुलिस ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, सोशल मीडिया सुरक्षा तथा ओटीपी और यूपीआई फ्रॉड से बचाव के उपाय समझाए। वहीं अमिलिया थाना पुलिस ने ग्राम कोदौरा तथा कमर्जी थाना पुलिस ने ग्राम बरिगमा में ग्रामीणों को डिजिटल लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और ऑनलाइन ठगी से बचने के तरीके बताए।
महिला थाना पुलिस ने शासकीय विद्यालय जोगीपुर में छात्र-छात्राओं को साइबर क्राइम, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग और डिजिटल सुरक्षा की जानकारी दी। चौकी खड्डी पुलिस ने ग्राम बडेसर तथा चौकी सिहावल पुलिस ने ग्राम बमुरी में ग्रामीणों को फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और ऑनलाइन ठगी से सतर्क रहने की सलाह दी।
इसी क्रम में भुईमाड़ थाना पुलिस ने ग्राम पंचायत गैवटा के देवरी में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, यूपीआई फ्रॉड, क्यूआर कोड स्कैम, सोशल मीडिया ठगी और फर्जी निवेश योजनाओं से बचाव के उपाय विस्तार से बताए। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा संबंधी पम्पलेट भी वितरित किए गए।
अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि किसी भी अज्ञात कॉल, संदेश, लिंक या क्यूआर कोड पर बिना सत्यापन विश्वास न करें और किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक खाते की जानकारी या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी ने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता और सतर्कता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होती है तो वह बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करे अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि सुरक्षित कराने की संभावना बढ़ जाती है।




