विश्व हृदय दिवस पर आयोजित गतिविधियों में दिया गया स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम का संदेश

विश्व हृदय दिवस पर आयोजित गतिविधियों में दिया गया स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम का संदेश
*रिपोर्ट*👉 अरुण मिश्रा
सीधी l मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आई जे गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 29 सितंबर को लोगों को अपने आपको स्वस्थ्य रखने, किस प्रकार स्वस्थ्य हृदय कार्य करता है यह बताने एवं जन-जागृति हेतु विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इसी संबंध में जिला स्तर पर शुक्रवार को आयोजित समीक्षा बैठक में ह्रदय रोग से बचाव के लिए उन्मुखीकरण किया गया। बैठक में हृदय रोग से बचने के लिए शारीरिक व्यायाम और संतुलित आहार को जीवन शैली में अपनाने की शपथ दिलाई गई।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम “एक मजबूत दिल और स्वस्थ जीवन के लिए स्वस्थ आहार ले, नियमित व्यायाम करें और तंबाकू का सेवन न करें” रखी गई है। इस दिवस पर कम्युनिटी हेल्थ आफिसरों द्वारा अपने-अपने केन्द्र पर सामुदायिक जागरुकता हेतु लोगों को एकत्रित कर योग और पोषक तत्वों से परिपूर्ण स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज से व्यंजन बनाने की प्रतियोगिता आयोजित की गई। साथ ही नशे की लत को छोड़ने, तंबाखू, शराब, नशीली दवाओं का सेवन न करने के लिए प्रतीज्ञा दिलायी गई। एच.डब्ल्यू.सी. केन्द्रों पर प्राथमिक तौर पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, बी.एम.आई. हीमोग्लोबिन की जांच भी की गई। किशोर-किशोरियों के द्वारा पोस्टर, रंगोली प्रतियोगिता में भाग लिया गया।
सी.एम.एच.ओ. डॉ गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में आरामदायक जीवनशैली के कारण खान-पान में हुए परिवर्तन के कारण तेज गति से हृदय संबंधी बीमारियां सामने आ रही हैं। हार्ट या दिल मांसपेशियों से बना एक पम्प है, जो सारे शरीर में रक्त प्रवाह का संचालन करता है। शरीर के सभी अंगों को जीवित रहने के लिए एवं सुचारू रूप से कार्य करने के लिए ऑक्सीजन, ग्लूकोज व कई अन्य महत्वपूर्ण तत्वों की निरंतर जरूरत रहती है। यह सभी खून द्वारा ही विभिन्न अंगों को पहुंचाये जाते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि जीवित रहने का आधार निरंतर रक्त प्रवाह ही है। इस रक्त प्रवाह को निरंतर जारी रखने का काम जो पम्प करता है वह दिल ही है। हृदय को काम करने के लिये स्वयं ऑक्सीजन एवं ग्लूकोज कि जरूरत होती है। हृदय कि मांसपेंशियों को खून पहुंचना बन्द हो जाए ऐसी स्थिति को हार्ट-अटैक कहते है। ऐसी स्थिति में मरीज को छाती मे तीव्र दर्द होता है, बेचैनी एवं घबराहट महसूस होती है तथा पसीना भी आता है। यदि हृदय के बड़े भाग में खून पहुंचना बंद हो जाये तो वहां की मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं। इससे हृदय खून पम्प नहीं कर पाता और मरीज का ब्लड प्रेशर गिरने लगता है एवं मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। सही समय पर इलाज न मिलने से हार्ट-अटैक के बाद लगभग 15 प्रतिशत मरीजों की मृत्यु कुछ ही घंटो में ही हो सकती है। समय से उचित इलाज करने पर इस मृत्यु दर को लगभग आधा किया जा सकता है।
कोलेस्ट्राल के बढ़े रहने से नलिकाओं की अंदरूनी सतह पर वसा के थक्के जम जाते हैं एवं मधुमेह मे शुगर बढ़े होने से इन्ही के उपर खून के थक्के भी जमने लगते है। यही सब प्रक्रियाएं धीरे-धीरे नलिकाओं को सिकोड़ देती हैं। ऐसी किसी भी जगह पर एकाएक खून के जम जाने से नलिकाएं पुरी तरह चोक हो जाती है एवं मरीज को हार्ट-अटैक हो जाता है। यदि हार्ट-अटैक होने के लगभग 3-4 घंटे के अंदर ही खून के थक्के घुलने की दवाईयां मरीज को दी जायें तो रूकावट दूर की जा सकती है एवं हृदय की मांसपेशियों को बचाया जा सकता है। आमतौर पर हार्ट-अटैक के प्रमुख लक्षण सीने के बीचो-बीच तीव्र दर्द होना एवं पसीना आना है। यह दर्द बायें हाथ में जबड़ों में दोनों हाथों एवं कंधों मे भी महसूस किया जा सकता है।
हार्ट-अटैक की संभावनाओं को बढ़ाने वाली स्थितियां – हाई बी.पी, मधुमेह, खुन में वसा के अनुपात में गड़बड़ी, मोटापा, व्यायाम की कमी, धुम्रपान या तम्बाकु का सेवन, गरिष्ठ एवं वसा युक्त भोजन, अनुवांशिकता-खून के रिश्ते में मधुमेंह, हाई बी.पी. या हृदय रोग का होना हैं। हार्ट अटैक से बचाव के लिए वजन पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम, मानसिक तनाव से दुर रहें, स्वस्थ खान पान रखें, तेलीय खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।




