प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने खेतों में पहुंचे कलेक्टर, किसानों से किया संवाद

सीधी। जिले में कृषि को अधिक लाभकारी बनाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कलेक्टर विकास मिश्रा ने विभिन्न ग्रामों का भ्रमण कर खेतों में पहुंचकर फसलों, उद्यानिकी गतिविधियों, दुग्ध संग्रहण व्यवस्था और खाद वितरण की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा की और आधुनिक व प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कलेक्टर ने सबसे पहले ग्राम उपनी में किसान हरिलाल जायसवाल के खेत का निरीक्षण कर कृषि एवं उद्यानिकी फसलों की स्थिति देखी। उन्होंने सिंचाई व्यवस्था और उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही तकनीकों की जानकारी ली तथा उद्यानिकी फसलों के विस्तार पर जोर दिया। इसी गांव में किसान के.के. तिवारी द्वारा की जा रही ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खेती का भी अवलोकन किया और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने की सलाह दी।
इसके बाद ग्राम सैरपुर में किसान दिनेश प्रताप सिंह के खेत पहुंचकर प्राकृतिक खेती से तैयार की गई मूंग एवं उड़द की फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
भ्रमण के दौरान किसान विश्वनाथ कुशवाहा के खेत में मक्का के साथ सब्जियों की इंटरक्रॉपिंग मॉडल का भी अवलोकन किया। कलेक्टर ने इस बहुफसली खेती मॉडल की सराहना करते हुए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को ऐसे सफल प्रयोग अन्य किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
ग्राम कोदोरा में किसान सिद्धनाथ पटेल द्वारा की जा रही ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खेती का निरीक्षण करने के बाद कलेक्टर ने कोदोरा और हिनौती स्थित मिल्क चिलिंग सेंटरों का भी जायजा लिया। उन्होंने दुग्ध संग्रहण, कोल्ड चेन, स्वच्छता और संचालन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए दुग्ध उत्पादकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
भ्रमण के अंतिम चरण में अमिलिया स्थित विपणन संघ के खाद वितरण केंद्र का निरीक्षण कर कलेक्टर ने उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीफ सीजन में किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध कराई जाए तथा किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी न हो।
कलेक्टर ने कहा कि शासन की प्राथमिकता किसानों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराना, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से खेतों का भ्रमण कर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और कृषि योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहुंचाने के निर्देश दिए।




