महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 143 करोड़ रुपये के ऋण का लक्ष्य, स्व-सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को मिलेगा लाभ

सीधी। जिले की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूहों एवं महिला उद्यमियों के लिए 143 करोड़ रुपये के ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी बैंकों को तय समय-सीमा में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
निर्धारित लक्ष्य के अनुसार जिले के 6060 महिला स्व-सहायता समूहों को बैंक लिंकेज (कैश क्रेडिट लिमिट) के माध्यम से 133 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं 1000 महिला उद्यमियों को स्वरोजगार एवं सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रुपये का मुद्रा ऋण दिया जाएगा।
बैंकवार लक्ष्य में मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक को सबसे अधिक 3839 समूहों के लिए 87.18 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 1220 समूहों के लिए 27.05 करोड़ रुपये, इंडियन बैंक को 404 समूहों के लिए 6.65 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक को 283 समूहों के लिए 6.05 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 197 समूहों के लिए 3.99 करोड़ रुपये तथा भारतीय स्टेट बैंक को 117 समूहों के लिए 2.08 करोड़ रुपये के बैंक लिंकेज का लक्ष्य दिया गया है।
मुद्रा ऋण योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक को 650, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 211, पंजाब नेशनल बैंक को 48, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 36, भारतीय स्टेट बैंक को 31 तथा इंडियन बैंक को 24 महिला हितग्राहियों को ऋण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कलेक्टर विकास मिश्रा ने सभी बैंक अधिकारियों एवं संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि महिला स्व-सहायता समूहों के बैंक लिंकेज और मुद्रा ऋण प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि 30 सितंबर 2026 तक वार्षिक लक्ष्य का 70 प्रतिशत तथा 30 दिसंबर 2026 तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाए। निर्धारित समय-सीमा में लक्ष्य पूरा नहीं होने पर संबंधित बैंक अथवा उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने कहा कि समय पर ऋण उपलब्ध होने से महिला स्व-सहायता समूह कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु उद्योग और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों का विस्तार कर सकेंगे। इससे महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।




