सीधी में श्रमिकों का घोर शोषण: कब जागेगा श्रम विभाग?

श्रमिकों का शोषण: सीधी जिले में थमने का नाम नहीं ले रहा है। श्रम विभाग की उदासीनता के चलते, मजदूरों के हितों की रक्षा करने वाले कानून और संस्थाएं बेअसर साबित हो रहे हैं।
12 घंटे काम, कम वेतन: श्रमिकों का शोषण
शहर के एक होटल में काम करने वाले मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे रोजाना 12 घंटे काम लिया जाता है, जबकि नियम के अनुसार 8 घंटे ही काम लेना चाहिए। ओवर टाइम करने पर भी उन्हें दोगुना वेतन और भोजन नहीं दिया जाता। यही हाल शहर के भोजनालयों और अन्य दुकानों में काम करने वाले श्रमिकों का शोषण है, जहां उन्हें न तो भविष्य निधि मिलती है और न ही सरकार द्वारा तय दरों पर वेतन। अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए मासिक दरें निर्धारित हैं, लेकिन श्रम विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
खुले बाजार, मजबूर श्रमिक: श्रमिकों का शोषण जारी
शहर में सप्ताह में एक दिन बंदी का नियम भी ताक पर रखा गया है। तमाम बाजार खुले रहते हैं, जिससे दुकानों पर काम करने वाले श्रमिकों का शोषण होता है। उन्हें सप्ताह में एक दिन का अवकाश भी नहीं मिलता, जिससे उनकी आर्थिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति खराब होती जा रही है।
बाल श्रम: श्रमिकों का शोषण और भविष्य से खिलवाड़
शहर में होटल, ढाबों और दुकानों में कम उम्र के बच्चों को भी काम पर रखा जा रहा है। 14 वर्ष से कम उम्र के श्रमिकों का शोषण तो और भी गंभीर है, क्योंकि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित मेहनताना भी नहीं दिया जाता।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर: श्रमिकों का शोषण का परिणाम
लगातार हो रहे श्रमिकों का शोषण का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। इसके चलते वे अवसाद और तनाव का शिकार हो रहे हैं, और उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
जिला प्रशासन से न्याय की गुहार: श्रमिकों का शोषण कब रुकेगा?
पीड़ित श्रमिकों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले भर में श्रमिकों का शोषण रोकने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए और उनके साथ न्याय किया जाए।




