सरपंच की बात को झुठला रहे प्रभारी सचिव,अपने कारनामों पर पर्दा डालने दूसरों को बता रहे दोषी

सरपंच की बात को झुठला रहे प्रभारी सचिव,अपने कारनामों पर पर्दा डालने दूसरों को बता रहे दोषी
सीधी। गांव के विकास की अवधारणा को लेकर बनी पंचायती राज व्यवस्था के नियमों को तार-तार करने वाले प्रभारी सचिव जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाकर शासन के मुद्दों पर ध्यान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। आदिवासी बाहुल्य विकासखंड क्षेत्र कुसमी के ग्राम पंचायत करैल मे अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर “पालपल टाइम्स” द्वारा प्रकाशित खबर को लेकर प्रभारी सचिव शिवा प्रसाद यादव द्वारा कतिपय समाचार पत्रों के माध्यम से खबर को झूठा बताने की कोशिश की गई है, तथा शिकायतकर्ता पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया है। “पलपल टाइम्स ” द्वारा प्रकाशित खबर की पुष्टि ग्राम पंचायत करैल के सरपंच द्वारा की गई है जिन्होंने दूरभाष पर चर्चा के दौरान यह स्वीकार किया है कि वर्ष 2023 -24 में निर्मित आधा दर्जन डी एप्रान का निर्माण कार्य अधूरा है जिसे पैसों के अभाव के चलते पूरा नहीं किया जा सकता है। सवाल यह उठता है कि जब निर्माण कार्य अधूरा है तो फिर वह कागज में कैसे पूरा हो गया। यह पंचायती राज की अवधारणा है या फिर कागजी विकास की अवधारणा है।
इसी बात को लेकर प्रभारी सचिव द्वारा कटी पर समाचार पत्रों को दिए गए अपने तथाकथित बयान में गांव के निवासी श्यामसुंदर यादव पर पारिवारिक विवाद और सरकारी जमीन पर सरहंगतापूर्वक अवैध कब्जे की बात कही गई है जिसका मामला उपखंड अधिकारी के न्यायालय में लंबित होना बताया गया है। जमीन पर वैथ अथवा अवैध कब्जे का निर्णय उपखंड अधिकारी के न्यायालय से होना है लेकिन जनहित के मुद्दों को उठाने वाले को सरंहग बताया जा रहा है। सरंहग वह होता है जो धन बल और बाहू बाल से समर्थ्यवान होता है। श्याम सुंदर यादव एक आम ग्रामीण नागरिक है जो समय-समय पर पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार को विभिन्न माध्यमों से उठता रहता है वहीं दूसरी तरफ प्रभारी सचिव धन बल और बाहुबल से पूरी तरह सक्षम है जिन पर शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की पूर्ण जिम्मेदारी है। शासन की विभिन्न योजनाएं ऐसी है जिनका लाभ ग्रामीण जनों को प्रभारी सचिव और रोजगार सहायक की कृपा पर ही मिलना निर्भर करता है।
अगर यह कहना गलत होता तो फिर प्रभारी सचिव सिंगरौली जिले के विकासखंड बैढन अंतर्गत ग्राम पोड़ी डोल में रह रहे अपने मामा के लड़के रामानुज यादव पिता हरख लाल यादव को वर्ष 2019-20 में ग्राम पंचायत करैल में मनरेगा योजना के तहत 158 दिनों की मजदूरी का भुगतान नहीं कर देते जबकि मनरेगा योजना में किसी भी श्रमिक को 100 दिनों से अधिक का रोजगार देने का प्रावधान ही नहीं है फिर रामानुज तो अपनी ग्राम पंचायत पोडीडोल मैं भी रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरी कर रहा है। क्या यह उदाहरण प्रभारी सचिव की मनमानी और सरहंगता को नहीं दर्शाता है, जिन्होंने भारत सरकार के नियमों तक को ठेगे पर रख दिया है। इनके और भी कई रिश्तेदार हैं बैठे तो दूसरे जिलों में हैं लेकिन उनकी कृपा से मनरेगा योजना का लाभ सीधी जिले की ग्राम पंचायत करैल में प्राप्त कर रहे हैं इसका खुलासा भी शीघ्र ही किया जाएगा।




