सीधी जिले में सरकारी डॉक्टर अपनी मिनी नर्सिंग होम चलाने के लिए लेते हैं जिला अस्पताल का सहारा

सीधी जिले में सरकारी डॉक्टर अपनी मिनी नर्सिंग होम चलाने के लिए लेते हैं जिला अस्पताल का सहारा
*रिपोर्ट*👉 अरुण मिश्रा
सीधी l जिस प्रकार आप बड़े शहर में किसी मरीज रिलेटिव को दिखाने के लिए जाते हैं वहां कई प्रकार के दलाल मिलते हैं, उनके द्वारा अक्सर यह बोला जाता है की आप इस अस्पताल में दिखाओ यहां आपके मरीज का सही इलाज हो जाएगा साथ ही कुछ दलाल ऐसे भी मिलेंगे कि आप इस जगह पर जांच कराओ रिपोर्ट सही निकलेगी रिपोर्ट की जांच सही आएगी, बड़े शहरों के दलाल ऐसा इसलिए बोलते हैं क्योंकि उनका अस्पतालों में कमीशन फिक्स होता है आप के मरीज को भर्ती करवा कर काउंटर से अपना कमीशन वो लोग परसेंटेज के हिसाब से लेते हैं जैसे आपका टोटल बिल ₹100000 बना है तो 5 से 20 परसेंट उनका कमीशन आराम से बन जाता है
ठीक वही स्थित सीधी जिला हॉस्पिटल का हो गया है क्योंकि वहां डॉक्टर मरीज को ढंग से देखने और जांच करवाने के बजाय अपनी राय मशवरा देते हैं कि मेरे मिनी नर्सिंग होम में पर्याप्त व्यवस्था है आप वही शिफ्ट हो जाओ यहां से अच्छा इलाज तो मेरे निजी अस्पताल में हो सकता है ,वहा आपकी जांच रिपोर्ट और इलाज तुरंत हो जाएगा
यहां आपको लंबा वक्त लग जाएगा ,अब मरीज प्राण बचाने के लिए डॉक्टर के शरण में उनके निजी अस्पताल में चला जाता है,अब आगे
डॉक्टर का चार्ज जांच रिपोर्ट का चार्ज, बेड चार्ज,ले लिए जाते है जहा सरकारी में 100 /200/500, 1000लगते वही गरीब जनता से कई प्रकार का माइंड ब्लोइंग टैक्स ले कर आम जनता को चूसने में जुटे हुए हैं,मिनी निजी नर्सिंग होम की सलाह देने के कारण शासन के द्वारा संचालित अस्पताल की फ्री दवाई गोली और जांच साथ ही बेडचार्ज के पैसे निजी डॉक्टरों के अस्पताल में देने को मजबूर हो जाते है,आयुष्मान कार्ड का ₹500000 लाख रुपए का उपयोग आम गरीब असहाय जनता नही कर पाती है ,डॉक्टरों की लिखी दवा उनके निजी जगह या उनके फिक्स मेडिकल स्टोर पर ही मिलती है जहा उनके कमीशन सेट होता है,जांच करवाने जाओ वहा पर भी डॉक्टरों के कमीशन सेट होता हैं,सीधी जिला अस्पताल पूर्ण रूप से दलाली की चपेट में आ गया है,आखिर जिले की जनता करे तो करे क्या बहुत ही विषम परिस्थितियों से गुजर रहा जिला अस्पताल सीधी सिर्फ मॉल पानी वाले ओहदा वाले पद के लिए डॉक्टर साहब लोग ज़िद पर अड़े हैं ,वही गरीब जनता गेहूं के साथ घुन जैसे पिस रही है,यही हाल रहा तो आने वाले दिन में कई मौते होंगी क्युकी ज़िला अस्पताल में कुछ सरकारी डॉक्टर वेतन तो लेते हैं लेकिन काम की जगह प्रायवेट खुद की अस्पताल चलाने में मगन रहते हैं, यहां सरकारी डॉक्टर आपके सेवा के लिए नहीं बल्कि आपका मेवा लेने के लिए जिले में पहचाने जाते हैं,गरीब बेबस जिले की जनता के लिए सभी शासकीय योजनाएं बनाई तो गई हैं लेकिन पालन कागज में होता है,आप बीमार हो जाओ और आपकी जेब गरम ना हो तो जिले में जान चली जाए कोई बो दिन देखना बाकी नहीं रह गया है, यहां डॉक्टर मरीज का प्राण बचाने के लिए नहीं बने है बल्कि जिले की जनता का खून चूसने की संपत्ति अर्जित करने के लिए जाने पहचाने जाते हैं , इसीलिए सीधी जिला अस्पताल के डॉक्टरों को जिले की जनता बद्दुआ देते हुए देखी वा सुनी जा सकती है l




