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वन भूमि पर कब्जे के फेर में कोर्ट ने लिया एक्शन,तहसीलदार, रेंजर, पटवारी और कारोबारी के खिलाफ दर्ज होगी FIR…

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चित्रकूट के रजौला में स्थित वन भूमि को निजी स्वामित्व की भूमि बताने वाले शहर के ऑटोमोबाइल कारोबारी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सतना जिला न्यायालय ने वन भूमि पर स्वामित्व का दावा खारिज कर दिया है। इस मामले में तब के वन और राजस्व विभाग के अधिकारी- कर्मचारियों समेत ऑटो मोबाइल कारोबारी और उनकी पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

 

 

सतना के नवम अपर सत्र न्यायाधीश योगी राज पांडेय ने चित्रकूट के रजौला में अनुसुइया वन खंड में स्थित आराजी खसरा नंबर 308 व 309 के अंश भाग पर ऑटो मोबाइल कारोबारी देवव्रत सिंह मुन्ना और उनकी पत्नी अनीता सिंह के स्वामित्व का दावा खारिज कर दिया है।

 

सिंह दंपती ने व्यवहार न्यायाधीश चित्रकूट रवीना चौधरी के आदेश के विरुद्ध नवम अपर सत्र न्यायालय सतना में विविध अपील प्रस्तुत की थी। जिस पर विचारण के बाद न्यायाधीश योगीराज पांडेय ने व्यवहार न्यायालय चित्रकूट के आदेश को यथावत रखते हुए कहा कि अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय में कोई त्रुटि नहीं है।

 

अदालत ने स्थगन के लिए प्रस्तुत अपील पर सुनवाई के बाद अपने निर्णय में कहा कि वन अधिनियम की धारा 4 के प्रकाशन के पूर्व अपीलार्थी सिंह दम्पति का कोई अधिकार नहीं था। ये भूमियां वन भूमि से राजस्व भूमि में परिवर्तित हुईं इसका भी कोई आदेश नहीं है।

 

प्रकरण में वन विभाग व शासन की तरफ से शासकीय अभिभाषक एवं लोक अभियोजक रमेश मिश्रा ने बताया कि चित्रकूट की आराजी नंबर 308 एवं 309 में संस्कृति वन बनाया जाना है। इसके लिए वहां वन विभाग ने निर्माण सामग्री गिराई तो अनीता सिंह एवं देवव्रत सिंह ने भूमि पर अपने स्वामित्व का दावा करते हुए सिविल न्यायालय चित्रकूट में स्थगन आवेदन प्रस्तुत कर दिया। वन मंडलाधिकारी विपिन पटेल ने इसकी जांच करा कर अदालत में प्रस्तुत जवाब में बताया कि आराजी नंबर 308 रकबा 36 एकड़ 84 डिसमिल और आराजी नंबर 309 रकबा 38 एकड़ 94 डिसमिल रिजर्व फारेस्ट है। ये भूमियां रजौला बीट के कक्ष क्रमांक पीएफ 18 में स्थित हैं। ये राजस्व भूमियां थी ही नहीं जिनके पट्टे दिए जाएं।

 

वन मंडलाधिकारी ने अपने जवाब में चित्रकूट की अदालत को बताया था कि जिस भइयालाल से भूमि क्रय करने का दावा किया जा रहा है,ये भूमियां कभी उसकी थी ही नहीं। उसका दावा भी 28 मार्च 2002 को अदालत से निरस्त किया जा चुका है। शासकीय अभिभाषक रमेश मिश्रा ने बताया कि चित्रकूट सिविल न्यायालय ने सिंह दम्पति का दावा खारिज करते हुए स्थगन देने से इंकार कर दिया था। जिसे नवम अपर सत्र न्यायालय में अपील के जरिए चुनौती दी गई थी।

 

रेंजर ने लिखा एफआईआर के लिए पत्र

 

इस मामले में अब चित्रकूट रेंजर ने चित्रकूट थाना प्रभारी को पत्र लिख कर तत्कालीन वन व्यवस्थापन अधिकारी केडी मिश्रा,तत्कालीन रेंजर आरके सिंह,तत्कालीन नायब तहसीलदार,तत्कालीन तहसीलदार रामनरेश पटेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा है। इनके अलावा आराजी नम्बर 308 एवं 309 का गलत तरीके से पट्टा हासिल करने वाले देवव्रत सिंह मुन्ना एवं उनकी पत्नी अनीता सिंह के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज करने की सिफारिश की गई है। हालांकि 10 जुलाई 2023 को भेजे गए इस पत्र पर अब तक चित्रकूट पुलिस ने एक्शन नहीं लिया है।


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