भोपाल दोहरा हत्याकांड: उपनिरीक्षक योगेश मरावी को दोहरे आजीवन कारावास की सजा

भोपाल। पत्नी और साली की हत्या के मामले में आरोपी उपनिरीक्षक योगेश मरावी को अदालत ने दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश श्रीमती सुचिता श्रीवास्तव की अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत दोनों हत्याओं के लिए अलग-अलग आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल का सश्रम कारावास भी दिया गया है।
विशेष लोक अभियोजक श्रीमती सुधाविजय सिंह भदौरिया ने बताया कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों सहित अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
दिसंबर 2024 में सामने आया था दोहरा हत्याकांड
अभियोजन के अनुसार, 3 दिसंबर 2024 को ऐशबाग थाना क्षेत्र में दो महिलाओं की हत्या का मामला सामने आया था। शिकायतकर्ता आर्या मंडावी को घर में काम करने वाली महिला ने फोन पर घटना की जानकारी दी थी। उसने बताया था कि सुबह काम पर पहुंचने के दौरान आरोपी योगेश मरावी घर में दाखिल हुआ और दरवाजा बंद कर लिया था।
सूचना मिलने के बाद परिजनों के साथ आर्या मौके पर पहुंचीं। घर के अंदर दोनों महिलाएं मृत अवस्था में मिलीं। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में जुटाए गए सीसीटीवी और अन्य साक्ष्य
पुलिस ने विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया। अभियोजन के मुताबिक, जांच में एक सुसाइड नोट बरामद किया गया, जिसे साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। घटनास्थल से वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी जब्त किया गया।
इसके अलावा घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और डीवीआर जब्त किए गए। पुलिस ने गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जब्ती दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
हत्या और आर्म्स एक्ट में सुनाई गई सजा
अदालत ने आरोपी योगेश कुमार मरावी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दो मामलों में दोषी पाते हुए दोहरा आजीवन कारावास और दोनों मामलों में 1,000-1,000 रुपये का अर्थदंड लगाया।
वहीं, आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
विशेष लोक अभियोजक श्रीमती सुधाविजय सिंह भदौरिया ने शासन की ओर से मामले में पैरवी की। अदालत ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और लिखित तर्कों पर विचार करने के बाद यह निर्णय सुनाया।



