नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी विजय विश्वकर्मा को 20 साल की सजा, पीड़िता को मिलेंगे 4 लाख रुपये

भोपाल। नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर दूसरे शहर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने आरोपी विजय विश्वकर्मा को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अदालत ने पीड़िता को 4 लाख रुपये का प्रतिकर देने का आदेश भी जारी किया है।
यह फैसला 24 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) एवं द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश मनोहरलाल पाटीदार की अदालत ने सुनाया। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अजय शंकर प्रजापति और ज्योति कुजूर ने पैरवी की।
मार्च 2024 में दर्ज हुई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट
अभियोजन के अनुसार, 30 मार्च 2024 को पीड़िता के माता-पिता ने भोपाल के कमला नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी बिना बताए घर से चली गई है। परिजनों ने आसपास, मोहल्ले और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की।
सूरत से दस्तयाब हुई थी बालिका
पुलिस ने 8 अप्रैल 2024 को बालिका को गुजरात के सूरत से दस्तयाब किया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी विजय विश्वकर्मा के विरुद्ध मामला दर्ज कर आगे की विवेचना की।
अभियोजन के मुताबिक, आरोपी बालिका को भोपाल से सूरत ले गया था, जहां उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध अपराध किया गया। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाई सजा
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य संबंधित तथ्य प्रस्तुत किए। इन पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी विजय विश्वकर्मा को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5एल/6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, धारा 366 के तहत दो वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
पीड़िता को 4 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश
अदालत ने पीड़िता को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से 4 लाख रुपये का प्रतिकर दिए जाने का आदेश भी जारी किया है। इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अजय शंकर प्रजापति और ज्योति कुजूर ने पैरवी की।



