बिना सीमांकन शुरू हुआ रेत कारोबार, गोपद नदी के अस्तित्व पर मंडराया खतरा
गोतरा और निधिपुरी सहित कई स्थानों पर रेत खदानों के संचालन में शर्तों के उल्लंघन के आरोप; बिना अनुमति मुरुम उत्खनन कर बनाई सड़क और रैंप, ग्रामीणों ने जांच की मांग उठाई

सीधी। सीधी और सिंगरौली जिले की सीमा से होकर बहने वाली गोपद नदी में रेत उत्खनन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि खनिज विभाग से सशर्त लीज स्वीकृत होने के बावजूद संबंधित निविदाकार संघमित्रा शिवशक्ति प्राइवेट लिमिटेड ने नदी का सीमांकन कराए बिना ही रेत कारोबार शुरू कर दिया है। इसके अलावा सड़क और रैंप निर्माण के लिए मुरुम उत्खनन की अनुमति लिए बिना बड़ी मात्रा में मुरुम निकाले जाने का भी आरोप है।
जानकारी के अनुसार, सीधी जिले की मड़वास तहसील के ग्राम निधिपुरी तथा कुसमी तहसील के ग्राम गोतरा क्रमांक 1, 2 और 3 एवं पोंड़ी में रेत कारोबार के लिए कंपनी के नाम लीज स्वीकृत की गई है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि नदी तक पहुंचने के लिए मुरुम का उत्खनन कर सड़क और रैंप बना दिए गए हैं। वहीं, वैध परिवहन पास (टीपी) के बिना रेत का कारोबार शुरू किए जाने की भी शिकायत सामने आई है।
निविदा की शर्तों के पालन पर उठे सवाल
रेत खदानों के संचालन के लिए जारी निविदा में कई शर्तें निर्धारित होती हैं। इनमें स्थानीय श्रमिकों से उत्खनन, प्रतिबंधित मशीनरी का उपयोग नहीं करना, नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान से बचाना, खदान की सीमा का निर्धारण कराना और सड़क निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति लेना शामिल हैं। इसके अलावा खनन एवं परिवहन गतिविधियों से जनहानि और वायु प्रदूषण रोकने के उपाय करना भी जरूरी होता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआत से ही इन शर्तों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष मनमाने तरीके से रेत उत्खनन और परिवहन के कारण नदी के अस्तित्व पर संकट पैदा हुआ था। इस दौरान कई दुर्घटनाएं भी हुई थीं। इसी वजह से ग्रामीण चाहते हैं कि इस बार खदान संचालन शुरू होने से पहले सभी निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
राजस्व विभाग के पास नहीं पहुंची जानकारी
मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेने पर उन्होंने संबंधित खदानों के संबंध में अपने कार्यालय में जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कही। निधिपुरी खदान के संबंध में पूछे जाने पर संबंधित अधिकारी ने बताया कि फिलहाल उनके कार्यालय में लीज स्वीकृति की जानकारी नहीं आई है। जानकारी प्राप्त होने पर मामले को संज्ञान में लिया जाएगा।
ग्रामीण ने प्रशासन से की जांच की मांग
गोतरा निवासी ग्रामीण रामेश्वर सिंह ने बताया कि गोतरा की रेत खदानों में कारोबार शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक सीमांकन नहीं कराया गया है। बड़ी मात्रा में मुरुम निकालकर नदी तक सड़क भी बनाई गई है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि खदान संचालन में निविदा की सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
फिलहाल सीमांकन, मुरुम उत्खनन की अनुमति और परिवहन पास से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खदान संचालक द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।


