राजस्थान मिष्ठान भंडार के सामने दुर्घटना का बना रहता है खौफ, मासूम गवा चुका है अपनी जान: आखिर क्यों नहीं हो रही कार्यवाही

राजस्थान मिष्ठान भंडार के सामने दुर्घटना का बना रहता है खौफ, मासूम गवा चुका है अपनी जान: आखिर क्यों नहीं हो रही कार्यवाही
*रिपोर्ट*👉 अरुण मिश्रा
सीधी l का हाल यह है की शहर के मुख्य मार्ग मे संचालित यह एकमात्र ऐसी दुकान राजस्थान मिठाई वाला गायत्री मंदिर के सामने जो कि राजस्थान मिष्ठान भंडार के नाम से संचालित है | दुकान के ग्राहकी के कारण सुबह 10 बजे से रात लगभग 10 बजे तक दिनभर भीड़ बनी रहती है| यह शहर के
नामची होटलो में गिना जाता है, इस होटल में आने वाले लोग फॉर्च्यून, इनोवा जैसी कारों से इनके ग्राहक आते हैं | ऐसे में जब से यह होटल खुलता है तब से यहा चार पहिया से लेकर मोटर सायकल तक का पार्किंग स्थल यह रोड बन जाती है | और इस होटल के अंदर से लेकर बाहर रोड तक में लोग खड़े होकर कचौड़ी तोड़ते नजर आते है | और देखते ही देखते पूरी की पूरी भीड़ बफर की तरह खड़ी नजर आती है| क्योंकि इस होटल में बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है | इससे आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितना नामची होटल है| और इसी भीड़ और वाहनों के जमावड़े के कारण पूरी यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है|और दिन भर अफरा -तफरी जैसा माहौल बना रहता है, नतीजन आए दिन एक्सीडेंट होता रहता है |अभी हाल ही के महीनों की बात करे तो एक सोना व्यापारी का बच्चा स्कूल बस की चपेट में आ गया और मौके में ही उसकी मृत्यु हो गयी | लेकिन फिर भी किसी को कोई फर्क़ नहीं पड़ता, स्थित ज्यों का त्यों बनी हुई है| ऐसे मे सवाल यह उठता है कि अखिर इतनी अराजकता क्यों है ?
सूत्रों की माने तो इस होटल की काजू कतली की मिठास ऐसी मोहिनी है कि जिले के आला अधिकारियों से लेकर सत्ताधारी नेता तक इनके काजू कतली की मिठास के गिरफ्त में है| सूत्र बताते हैं कि अधिकारीयों के यहां जाने
वाली मिठाईयां बेहद महंगी और ऊँची क्वालिटी की होती है | लेकिन सोचने वाली बात यह है कि ये क़ीमती और ब्रांडेड मिठाइयां इनं अधिकारियों के लिए पूर्णतः नि: शुल्क होती हैं | अब जिस ज़माने में लोग नमक ने साथ गद्दारी नहीं करते उस ज़माने में सहाब तो मिठाई खाए हैं अगर गलती से कार्यवाही हो गई तो मिठाई के साथ गद्दारी कहलाएगी |
सीधी मार्केट में ईमानदारी की छाप छोड़ती ट्रैफ़िक पुलिस के आगे किसी की मजाल क्या कि कोई ठेला भी रोड के अंदर कर दे | पुलिस की आँखों से कोई नहीं बच सकता | वो बात अलग है कि राजस्थानी वाला भले ही रोड में होटल चलाए | इसी रास्ते से आता – जाता
प्रसाशन को इस होटल के पास पहुचते ही मिठाइयों के मिठास के आगे दिखाई देना बंद हो जाता है | ट्रैफ़िक पुलिस माइक में चिल्ला चिल्ला के ठेले और वाहन बलों को जाम से हटाती है और घत लग गया तो चलान भी थमा देती है लेकिन यही ट्रैफिक पुलिस जैसे ही राजस्थानी के होटल के सामने पहुंचती है तो भीगी बिल्ली बन जाती है, लाउड स्पीकर तो छोड़ो जनाब, सहाब के मुह से एक शब्द भी नहीं निकल पाता |




