बैजनाथ सभागार सीधी में नाटक बसामन मामा का हुआ शानदार मंचन

बैजनाथ सभागार सीधी में नाटक बसामन मामा का हुआ शानदार मंचन
*प्रकृति सुरक्षा के लिए विन्ध्य पहले से ही रहा जागरूक*
*रोशनी प्रसाद मिश्र विरचित नाटक बसामन मामा की भारत रंग महोत्सव में होगी प्रस्तुति*
*18 फरवरी 2024 को दुनिया के सबसे बड़े नाट्य महोत्सव भारंगम में ‘बसामन मामा’ नाटक का होगा मंचन*
*इन्द्रवती नाट्य समिति के बहुचर्चित नाटक बसामन मामा का पटना में होगा मंचन*
बैजनाथ सभागार सीधी में बीते दिन इन्द्रवती नाट्य समिति ‘सीधी रंगमंच’ के बहुचर्चित नाटक “बसामन मामा” का शानदार मंचन किया गया जो विशेष रूप से सीधी के मीडिया परिवार के लिए किया गया इसके एक दिवस पूर्व भी उसी सभागार में दर्शकों के लिए नाटक का मंचन किया गया था।नाटक की कहानी सत्य घटना पर आधारित रही जो कुम्हरा गांव के राजा भेददेव सिंह द्वारा बसामन शुक्ला के आंगन के पीपल वृक्ष को काटे जाने की सत्य घटना को दर्शाती है जिसकी कहानी कुछ इस प्रकार है बीड़ा सेमरिया के पास स्थित ग्राम कुम्हारा में बसामन शुक्ला नाम का एक व्यक्ति रहता है जो पीपल यानि बासुदेव को ईश्वर का रूप मानता है और उनकी सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार रहता है एक दिन राजा के सैनिक हाथी को पीपल का पत्ता खिलाने के लिए पीपल की डाली काटने लगते हैं और बसामन उन्हें रोक देता है जिसके बाद राजा उसे अपना दुश्मन मान बैठता है और मौके की तलाश में रहता है इसी बीच भांट बसामन के विवाह के दिन पीपल कटवाने की सलाह देता है और राजा जिद बस ऐसा ही करता है,इस घटना को बसामन सहन नहीं कर पाता और होता यह है कि राजा का विरोध करने पहुंच जाता है राजमहल पर राजा सारे दरवाजे बंद करवा देता है तब बसामन हार मानकर अपने पेट में कटार मारकर प्राण त्याग देता है जिसके कारण भांट को आत्मग्लानि होती है और वह भी आत्महत्या कर लेता है। इसके बाद बसामन की आत्मा राजा व मंत्री संत्री सहित पूरे सैनिकों और राजमहल को नष्ट कर देता है और पीपल की सूखी डाल को गाड़कर शारदा मां की सेवा में चला जाता है जो उसकी तपस्या के कारण हरी हो जाती है।बारह वर्ष बाद सिद्धि प्राप्त कर अपने गांव में चौरा लेता है और लोगों की दुख पीड़ा दूर करने लगते हैं धीरे धीरे प्रसिद्धि मिल जाती है और भक्तों का मेला लगने लगता है।नाटक में बघेली लोक संस्कृति और संस्कार को जिस तरह संजोया गया है वह काबिले तारीफ़ रहा,नाटक के अंत में राजा और बसामन के युद्ध वाले दृश्य में गिमिक का प्रयोग नाटक को भी और प्रभावी बना देता है जिसे देख दर्शक अचंभित रह जाते हैं। नाटक का लेखन व संगीत निर्देशन सीधी के युवा रंगकर्मी रोशनी प्रसाद मिश्र ने किया है तथा निर्देशन रजनीश कुमार जायसवाल द्वारा किया गया था।संगीत संयोजन प्रजीत साकेत ने किया तथा सहयोगी रहे दान बहादुर घासी, हरि प्रसाद घासी,जगन्नाथ घासी व संजय घासी। प्रस्तुति प्रबंधन नीरज कुंदेर का रहा।
मुख्य पात्र बसामन की भूमिका उत्कर्ष गुप्ता ने बखूबी निभाया जो बहुत ही सराहनीय रहा इसके अतिरिक्त मंच पर राजा की भूमिका में देवेंद्र कुशवाहा ने अभिनय का जादू बिखेरा,अभिनय करने वाले अन्य पात्रों में शिवानी मांचवे,अंकिता सोंधिया,प्रियंका सिंह, अनुभूति कुंदेर,खुशबू जायसवाल,लकी चतुर्वेदी, नीरज कुंभारे, अमन राय, शुभम राजपूत, संदीप बंशकार,प्रहलाद मिश्र,अनमोल पाण्डेय,अभिनय कुंदेर शामिल रहे। इन्द्रवती नाट्य समिति के निदेशक नीरज कुंदेर,नाटक के लेखक रोशनी प्रसाद मिश्र व नाटक निर्देशक रजनीश जायसवाल ने बताया की 18 फरवरी 2024 को कालिदास रंगालय पटना बिहार में इस नाटक की प्रस्तुति दुनिया के सबसे बड़े नाट्य महोत्सव 25 वें “भारत रंग महोत्सव” में होना है जो राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली द्वारा आयोजित किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे बघेलखंड की लोक संस्कृति दुनिया भर में चर्चित होगी जो सीधी के लिए सौभाग्य का विषय है।




