सीधी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: गुमशुदा बच्चों को परिजनों से मिलाकर दिल जीत लिया, लेकिन बढ़ती गुमशुदगी पर चिंता भी बरकरार

सीधी पुलिस की तत्परता से 08 गुमशुदा सुरक्षित मिले
सीधी पुलिस द्वारा गुम बालिकाओं की दस्तयाबी हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत बड़ी सफलता हासिल की गई है। पुलिस ने 06 नाबालिक और 02 बालिकाओं को अलग-अलग राज्यों और जिलों से ढूंढ़कर परिजनों को सौंपा। यह सफलता पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशन में तथा पुलिस अधीक्षक डॉ. रवीन्द्र वर्मा और उनके अधीनस्थ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संभव हो सकी।
सीधी पुलिस ने राजकोट से 1100 किलोमीटर दूर से किशोरी को खोज निकाला
सीधी पुलिस की टीम, खड्डी चौकी प्रभारी सउनि नीरज साकेत के नेतृत्व में, ढाई महीने से लापता किशोरी को 1100 किलोमीटर दूर राजकोट (गुजरात) से दस्तयाब करने में सफल रही। साइबर सेल की मदद और सतत प्रयासों के चलते किशोरी को वापस लाकर परिजनों के सुपुर्द किया गया। इस मिशन में साइबर सेल से आर. कृष्ण मुरारी द्विवेदी ने भी अहम भूमिका निभाई।
सीधी पुलिस की चौकसी से रायबरेली, कोटा और सिंगरौली से भी सफलता
सीधी पुलिस की अन्य टीमों ने भी उल्लेखनीय प्रयास किए। पथरौला चौकी प्रभारी प्रीति वर्मा के नेतृत्व में रायबरेली से एक नाबालिक किशोरी को ढूंढा गया, वहीं कोतवाली पुलिस ने कोटा (राजस्थान) और चितरंगी (सिंगरौली) से दो अन्य किशोरियों को दस्तयाब किया। कुछ मामलों में महज 24 घंटों के भीतर ही सफलता हासिल हुई।
सीधी पुलिस ने मड़वास और रामपुर नैकिन में भी गुमशुदा को लौटाया घर
सीधी पुलिस के थाना मड़वास और थाना रामपुर नैकिन की टीमों ने दो महिला और किशोर को क्रमशः 20 और 29 अप्रैल को दर्ज मामलों में ढूंढ़ निकाला। थाना प्रभारी केदार परौहा और निरीक्षक सुधांशु तिवारी के नेतृत्व में टीमें तत्परता से कार्य कर सकीं और गुमशुदा को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया गया।
सीधी पुलिस का मिशन: बम्हनी से भी 48 घंटे में दस्तयाब
सीधी पुलिस की बम्हनी टीम ने भी तेजी से काम करते हुए 48 घंटे के भीतर लापता किशोरी को खोजकर परिजनों को सौंपा। इस अभियान में उनि विकास सिंह और उनकी टीम ने बेहतर तालमेल और कार्यकुशलता का परिचय दिया।
निष्कर्ष:
सीधी पुलिस का यह अभियान निश्चित ही प्रशंसा के योग्य है, लेकिन यह भी स्पष्ट करता है कि जिले में गुमशुदगी की घटनाएं चिंताजनक हैं। इस प्रकार की कार्रवाई न केवल पुलिस की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि समाज में सुरक्षा की भावना को भी मजबूती देती है। फिर भी ज़रूरत है कि हम मूल कारणों पर भी गौर करें ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।




