सीधी की महिलाओं ने रचा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय, स्वतंत्रता दिवस समारोह में मिला विशेष सम्मान

सीधी। ग्रामीण महिलाओं के लिए स्व सहायता समूह अब सिर्फ बचत और ऋण का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन रहे हैं। सीधी जिले में मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं खेती, खाद्य प्रसंस्करण, लघु वनोपज, सिलाई, वित्तीय सेवाओं और छोटे कारोबार के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं।
इन महिलाओं के काम को पहचान देते हुए स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व सहायता समूह की महिलाओं को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। कलेक्टर विकास मिश्रा ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें सम्मान दिया।
कुसमी की कलावती सिंह ने सावित्रीबाई फुले स्व सहायता समूह से जुड़कर धान चक्की, आटा चक्की, थ्रेशर और ट्रैक्टर जैसी कृषि गतिविधियां शुरू कीं। इससे वह सालाना करीब 1.50 से 2 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। वहीं राजमती सिंह फलोद्यान, जैविक खेती, जैविक खाद और पारंपरिक बीज संरक्षण के जरिए प्रगतिशील किसान के रूप में काम कर रही हैं।
मझौली की मंजू सिंह और चंद्रवती साकेत महुआ संग्रहण के साथ महुआ बिस्किट और लड्डू जैसे उत्पादों की मार्केटिंग से जुड़ी हैं। प्रेमवती सिंह ने सब्जी उत्पादन से शुरुआत कर ट्रैक्टर खरीदा और परिवार के लिए होटल व्यवसाय शुरू कराया। वह लखपति दीदी के साथ उन्नतशील किसान के रूप में भी काम कर रही हैं।
रामपुर नैकिन की अंजुला दाहिया साबुन, रंग-गुलाल निर्माण और कृषि गतिविधियों से जुड़ी हैं। मनोरमा सिंह सिलाई सेंटर चलाकर दूसरी महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं, जबकि सीता साकेत मुर्गी पालन और सिलाई के साथ बैंक सखी के रूप में ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सेवाओं से जोड़ रही हैं।
सीधी विकासखंड की उर्मिला विश्वकर्मा, रामरती केवट और राजकली साकेत भी सिलाई, कृषि, सब्जी उत्पादन, कियोस्क और गैस बिलिंग जैसी गतिविधियों के जरिए परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
सिहावल की गीता सोंधिया सब्जी उत्पादन, ट्रेवल्स और इलेक्ट्रिक-ऑटो पार्ट्स रिपेयरिंग से जुड़ी हैं। वहीं संगीता मिश्रा कृषि और सब्जी उत्पादन के साथ उत्पादक समूह के माध्यम से अरहर की दाल तैयार कर उसकी बिक्री कर रही हैं।
इन महिलाओं की कहानी यह दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, समूह आधारित वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सिर्फ परिवार की आय में मददगार नहीं रहतीं, बल्कि खुद रोजगार पैदा करने वाली उद्यमी भी बन सकती हैं। स्वतंत्रता दिवस समारोह में मिला सम्मान उनके इसी बदलाव और आत्मनिर्भरता की पहचान बना।




