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प्लाट बेचने का अनुबंध कर फर्जीवाडा करने वाले आरोपी को हुआ 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास 

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प्लाट बेचने का अनुबंध कर फर्जीवाडा करने वाले आरोपी को हुआ 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास

 

इंदौर – जिला अभियोजन अधिकारी श्री संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि दिनांक 11.10.2023 को माननीय न्यायालय – श्री आर.एस.दोहरे, माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेंणी, अंबेडकरनगर जिला इंदौर ने थाना किशनगंज, जिला इंदौर के अपराध क्रमांक 117/2021 में निर्णय पारित करते हुए आरोपी जितेश नसीने आयु 47 वर्ष निवासी सैक्टर 9 सीवीडी बेलापुर नवी मुंबई, महाराष्ट्र को धारा 420 एवं 406 भा.दं.सं में दोषी पाते हुए 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5000-5000/- रुपये के अर्थदण्डे से दण्डित किया गया। प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री महेंद्रसिंह मुजाल्दे द्वारा की गई।

अभियोजन प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि आरोपी जितेश फिनिक्स इन्फ्रा इस्टेट इंटरनेशनल लिमिटेड का निदेशक था, उसके द्वारा ग्राम भगोरा तहसील डॉ. अम्बेडकर नगर जिला इंदौर में स्थित भूमि सर्वे कमांक – 526/1 526/2, 526/4, 547/4, 548 / 1 548 / 2 पर कॉलोनी विकसित की तथा उक्त कम्पनी द्वारा उक्त कॉलोनी में भूखण्ड क्रमांक- ई-45 क्षेत्रफल: 1210 वर्ग फिट विक्रय करने हेतु फरियादी संजय दीक्षित के पक्ष में दिनांक 18.04.2013 को अनुबंध पत्र निष्पादित कर धनराशि प्राप्त की गई। तत्पश्चात् फरियादी संजय दीक्षित द्वारा उक्त कम्पनी के कर्मचारी राहुल खण्डेलवाल से सम्पर्क किया गया तो उसके द्वारा यह बताया गया कि उक्त कम्पनी फरार हो गई है। फरियादी के पक्ष में उक्त कम्पनी द्वारा भूखण्ड का विक्रय पत्र निष्पादित नहीं कराया गया तथा न ही उसकी धनराशि वापस की गई। उक्त घटना के संबंध में फरियादी संजय दीक्षित द्वारा पुलिस अधीक्षक पश्चिम इंदौर के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर पुलिस ‘थाना किशनगंज ने अपराध कमांक – 177 /2021, धारा 420, 406 सहपठित धारा 34 भादंसं के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर अनुसंधान प्रारम्भ किया गया। अनुसंधान के दौरान फरियादी संजय दीक्षित के आधिपत्य से अनुबंध पत्र दिनांकित 18.04.2013 एवं रसीदें जप्त की गई। साक्षी के कथन लेखबद्ध किये गये। आरोपी को गिरफ्तार किया गया। फिनिक्स इन्फ्रा. इस्टेट इंटरनेशनल लिमिटेड कम्पनी से उसका “आर्टिकल्स ऑफ एसोशियेशन” प्राप्त कर प्रकरण में संलग्न किया गया तथा सम्पूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।, जिस पर से आरोपी को उक्तन सजा सुनाई गई।

 

 


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