सीधी पुलिस की शानदार कार्रवाई: दो नाबालिक किशोरियों की सकुशल वापसी, लेकिन लगातार बढ़ रही गुमशुदगी चिंता का विषय

सीधी। सीधी पुलिस की कार्रवाई एक बार फिर प्रशंसनीय साबित हुई है। गुमशुदा नाबालिक किशोरियों की दस्तयाबी हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत पुलिस ने दो किशोरियों को सकुशल ढूंढ़कर परिजनों को सौंपा है। पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार यह अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 14 दिनों में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 16 किशोरियों की दस्तयाबी की जा चुकी है।
सीधी पुलिस की कार्रवाई ने बढ़ाया विश्वास
सीधी पुलिस की कार्रवाई से आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। पुलिस अधीक्षक डॉ. रविंद्र वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अरविंद श्रीवास्तव, उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय श्रीमती गायत्री तिवारी एवं एसडीओपी चुरहट श्री आशुतोष द्विवेदी के मार्गदर्शन में यह सफलताएं संभव हो सकीं।
सीधी पुलिस की कार्रवाई: जमोड़ी से दस्तयाब हुई किशोरी
सीधी पुलिस की कार्रवाई के तहत थाना जमोड़ी क्षेत्र की एक नाबालिक लड़की, जो 30 अप्रैल को लापता हुई थी, को ढूंढ़कर उसके परिजनों को सौंपा गया। परिजनों द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद थाना प्रभारी उप निरीक्षक दिव्य प्रकाश त्रिपाठी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी दक्षता का उपयोग कर लड़की को खोज निकाला। इस कार्रवाई में सउनि. गोविन्दलाल, प्रआर लल्लू विश्वकर्मा और महिला प्रआर. किरण मिश्रा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सीधी पुलिस की कार्रवाई: कमर्जी पुलिस ने दिखाई तत्परता
सीधी पुलिस की कार्रवाई की दूसरी सफलता थाना कमर्जी द्वारा मिली, जहां एक किशोरी जो उपचार हेतु जिला अस्पताल सीधी गई थी, लापता हो गई। रिपोर्ट दर्ज होते ही थाना प्रभारी उनि. पवन सिंह ने विशेष टीम बनाकर तत्काल कार्रवाई की। टीम ने मात्र 8 घंटे में लड़की को मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) से दस्तयाब कर लिया और उसे सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया। इस प्रयास में सउनि. केशरी पाण्डेय, आर. शुभम सिंह, आर. सतीश मिश्रा और साइबर सेल के आर. कृष्णमुरारी द्विवेदी की भूमिका सराहनीय रही।
सीधी पुलिस की कार्रवाई: 14 दिनों में 16 किशोरियों की हुई वापसी
सीधी पुलिस की कार्रवाई ने यह दिखाया है कि यदि तकनीकी दक्षता और मानव संवेदनाएं साथ हों, तो परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होते हैं। अभियान के मात्र 14 दिनों में ही 16 नाबालिक किशोरियों की दस्तयाबी होना, पुलिस की गंभीरता और तत्परता को दर्शाता है। हालांकि, लगातार गुम हो रही बालिकाएं समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंताजनक संकेत हैं, जिस पर दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है।




