अवयस्क अभियोक्त्री के व्यपहरण एवं दुष्कर्म के आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास

अवयस्क अभियोक्त्री के व्यपहरण एवं दुष्कर्म के आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास
बताया गया कि दिनांक 11.07.2023 को अभियोक्त्री के पिता ने इस आशय की प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना कोतवाली सीधी में लेख करायी कि दिनांक 10.07.2023 को सुबह करीब 10:00 बजे उसकी सबसे छोटी लड़की अभियोक्त्री घर से अपनी मां को बटौली मंदिर जाने का कहकर निकली थी जो शाम 4:00 बजे तक वापस नहीं आयी। जब अभियोक्त्री के पिता ने अभियोक्त्री की पता तलाश पड़ोस में व मोबाइल से रिश्तेदारी में किया था किन्तु कोई पता नहीं चला। उक्त पर से थाना कोतवाली सीधी द्वारा गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज की गई तथा गुमशुदगी रिपोर्ट के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट अपराध क्र.-662/2023 अंतर्गत धारा 363 भा.दं.सं. में पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान अभियोक्त्री को दस्तयाब कर उसके माता-पिता को सुपुर्द किया गया। अभियोक्त्री ने अपने बयान में बताया कि अभियुक्त अभियोक्त्री का पड़ोसी होने के कारण उसके घर आता-जाता था तथा आरोपी ने अभियोक्त्री के साथ दिनांक 17.02.2023 को उसके घर आया और उसके साथ गलत काम किया था जिस कारण अभियोक्त्री गर्भवती हो गई थी। गर्भवती होने की बात अभियोक्त्री ने अभियुक्त को बतायी थी। दिनांक 10.07.2023 को अभियेाक्त्री जब मंदिर जा रही थी तभी आरोपी वहां आटो लेकर आया और उसे आटो में बैठाकर सीधी ले गया और वहां से बस में बैठाकर सतना व सतना से सूरत ले गया, जहां आरोपी ने अभियोक्त्री को अपने साथ रखा था और उसके साथ गलत काम करता था। प्रकरण की विवेचना पूर्ण कर विवेचना में आये तथ्यों के आधार पर प्रकरण में धारा 363, 366ए, 376(2)(एन) भादवि एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 5(जे)(आईआई)/6 के अंतर्गत अभियोग पत्र माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट सीधी में प्रस्तुत किया गया, जिसके न्यायालयीन विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 19/2024 में शासन की ओर से सशक्त पैरवी करते हुए सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री प्रशान्त कुमार पाण्डेय के द्वारा अभियुक्त को संदेह से परे प्रमाणित कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप माननीय न्यायालय विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट सीधी के द्वारा अभियुक्त सुजीत कोरी पिता मोहन प्रसाद कोरी उम्र 29 वर्ष जिला सीधी को धारा 5(एल)/6 एवं धारा 5(जे)(आईआई)/6 पॉक्सो एक्ट में दोषसिद्ध करते हुए 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं कुल 10,000/- रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। साथ ही अर्थदण्ड की संपूर्ण राशि 10,000/-रूपये अभियोक्त्री को अपील अवधि पश्चात अपील न होने की स्थिति में अभियोक्त्री को क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान किये जाने का आदेश पारित किया गया। इसके अतिरिक्त जाये। इसके अतिरिक्त अभियोक्त्री को 50,000/- (पचास हजार रूपये) प्रतिकर के रूप में अदा किये जाने के परिप्रेक्ष्य में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला सीधी म.प्र. को पत्र सहित निर्णय की प्रति प्रेषित की गई।
(2). *प्रताडित कर आत्महत्या के लिये दुष्प्रेरित करने वाले आरोपी को 07 वर्ष का कारावास*
बताया गया कि ग्राम तिलवारी में अभियुक्त ने वर्ष 2020 में मृतिका सोनाकली सिंह को अपनी पत्नी बनाकर अपने घर में रख लिया था, तब से अभियुक्त एवं मृतिका पति-पत्नी के रूप में साथ-साथ निवासरत थे। पश्चात् में अभियुक्त मृतिका के साथ मारपीट कर उसे प्रताड़ित करने लगा। अभियुक्त मृतिका को तेल साबुन नहीं देता था तथा मृतिका जो पैसे अपने पास रखी थी, उसे जबरदस्ती ले लिया तथा अभियुक्त मृतिका से कहता था कि वह भगोड़ी है, भागकर उसके पास आयी है, वह उसे नहीं रखेगा, दूसरी शादी कर लेगा और इस प्रकार अभियुक्त लगातार मृतिका को प्रताड़ित करता रहा, जिससे तंग आकर मृतिका ने दिनांक 21.06.2023 व 22.06.2023 को रात्रि में अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतिका सोनाकली सिंह की फांसी लगाने से मृत्यु हो जाने की सूचना उसके ससुर भैयालाल सिंह द्वारा दिनांक 22.06.2023 को सुबह 09:30 बजे थाना मझौली में दी जाने पर आकस्मिक एवं अकाल मृत्यु की सूचना क्रमांक 115/23 दर्ज की गयी। मर्ग जांच के उपरांत अभियुक्त के विरुद्ध अपराध पाए जाने पर थाना मझौली में अपराध क्र0 805/23 पंजीबद्ध कर प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध की गयी। संपूर्ण विवेचना पश्चात् अभियोग पत्र माननीय सत्र न्यायालय सीधी में प्रस्तुत किया गया, जिसके न्यायालयीन सत्र प्रकरण क्रमांक 137/2023 में शासन की ओर से पैरवी करते हुए लोक अभियोजक श्री सुखेन्द्र द्विवेदी के द्वारा अभियुक्त को संदेह से परे प्रमाणित कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सीधी के द्वारा अभियुक्त संजय उर्फ बाबूलाल सिंह गोंड़ तनय भैयालाल सिंह गोंड़, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम तिलवारी, थाना मझौली, जिला सीधी (म0प्र0) को धारा 306 भा0द0वि0 के आरोप में 07 वर्ष के सश्रम कारावास व 5000/-रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।




