रीवा

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज रीवा में, प्राकृतिक खेती प्रकल्प का करेंगे शुभारंभ

रीवा एयरपोर्ट एवं बसामन मामा गौ धाम क्षेत्र नो-फ्लाई रेड जोन घोषित

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रीवा- केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज 25 दिसम्बर को एक दिवसीय विंध्य प्रवास पर रीवा पहुंच रहे हैं। वे दोपहर लगभग 2:45 बजे रीवा एयरपोर्ट पर आगमन करेंगे। गृह मंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर रीवा एयरपोर्ट एवं बसामन मामा गौ धाम क्षेत्र को नो-फ्लाई रेड जोन घोषित किया गया है।

अपने प्रवास के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में प्राकृतिक खेती प्रकल्प का शुभारंभ करेंगे। इसके पश्चात वे गौ अभ्यारण्य के समीप आयोजित विशाल किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सहित विंध्य क्षेत्र के सांसद गणेश सिंह, जनार्दन मिश्र, डॉ. राजेश मिश्र एवं क्षेत्रीय विधायकगण भी उपस्थित रहेंगे।

बसामन मामा गौ अभ्यारण्य निराश्रित एवं बीमार गौवंश को संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। वर्तमान में इस अभ्यारण्य में सात हजार से अधिक गौवंश को आश्रय दिया गया है। गौ सेवा के लिए 30 से अधिक कर्मचारी एवं गौ सेवक तैनात हैं, वहीं बीमार पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सकों की भी व्यवस्था की गई है। अभ्यारण्य से प्रतिदिन निकलने वाले गोबर से जैविक खाद, गोकाष्ठ, गोनाइल सहित अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।

बसामन मामा विंध्य क्षेत्र के लोक देवता माने जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए पीपल वृक्ष की रक्षा में अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले बसामन मामा की स्मृति में टमस नदी के किनारे पुरवा में बसामन मामा धाम विकसित किया गया है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी क्षेत्र में स्थापित गौ अभ्यारण्य अब प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विकास का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।

यहां श्री श्री रविशंकर की सामाजिक संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवकों तथा स्थानीय किसानों के सहयोग से प्राकृतिक खेती के विभिन्न मॉडल विकसित किए गए हैं। जैविक विधि से गेहूं, कोदो, मक्का, ज्वार सहित अन्य अनाजों की खेती, आम और अमरूद के बगीचे, फल-सब्जियों के मॉडल तथा अग्निहोत्र खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़, पानी एवं स्थानीय औषधियों से जैविक खाद और कीटनाशक तैयार कर अभ्यारण्य की फसलों में उपयोग किया जा रहा है।

प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों की बढ़ती रुचि को देखते हुए अभ्यारण्य के आसपास के लगभग 50 गांवों के किसानों को इससे जोड़ा गया है। करीब पांच हजार किसानों ने जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए पंजीयन कराया है। किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से इन किसानों को संगठित किया जा रहा है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मुक्त अनाज न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए ‘एक एकड़–एक मौसम’ के मंत्र से प्रेरित होकर किसान बिना जोखिम उठाए प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं। बसामन मामा गौ अभ्यारण्य 52 एकड़ क्षेत्र में स्थापित है और अब यह गौ संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।


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