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Rewa News: कलेक्टर का बड़ा एक्शन, 5 अधिकारियों को नोटिस, मचा हड़कंप

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Rewa News: रीवा जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बच्चों के नामांकन में लापरवाही पाए जाने पर पांच परियोजना अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस कदम को कुपोषण नियंत्रण और महिला-बाल विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में अहम माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई आंगनवाड़ी केंद्रों में अपेक्षित संख्या में बच्चों का पंजीयन नहीं हो रहा है। इसके अलावा कई स्थानों पर बच्चों की नियमित उपस्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया, जिसमें स्थिति कमजोर पाई गई।

इसी लापरवाही के चलते परियोजना अधिकारी रेणुका मिश्रा (रायपुर करचुलियान), सुमन नामदेव (रीवा), अमन कुशवाहा (गंगेव), दीपक मिश्रा (त्यौंथर) एवं श्रीमती सपनाराम तिवारी (त्यौंथर) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सभी अधिकारियों को तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र शासन की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल हैं, जहां बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की नींव रखी जाती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रशासन द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने के लिए कई प्रयास किए जा चुके हैं। कलेक्टर स्वयं कई केंद्रों का औचक निरीक्षण कर चुके हैं, जहां व्यवस्थाओं में कमियां सामने आई थीं। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर अब यह कड़ा कदम उठाया गया है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा “सुपोषण अभियान” और “घर-घर संपर्क अभियान” जैसे कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि यदि आंगनवाड़ी केंद्रों में नामांकन कम रहता है, तो इसका सीधा असर बच्चों के विकास और कुपोषण दर पर पड़ता है।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाकर नामांकन और उपस्थिति बढ़ाने पर फोकस करें। उन्होंने कहा कि हर पात्र बच्चे तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

इस कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है और अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।


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