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वन विभाग का काला सच, चौकीदार को बना दिया गवाह मंदिर ध्वस्त करने के मामले में आया नया मोड़  पुलिस और वन विभाग में श्रेय लेने की मची होड़ 

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वन विभाग का काला सच, चौकीदार को बना दिया गवाह

मंदिर ध्वस्त करने के मामले में आया नया मोड़

पुलिस और वन विभाग में श्रेय लेने की मची होड़

 

सीधी । जिले का वन विभाग लगातार भ्रष्टाचार का परिचायक बनता हुआ नजर आ रहा है सिर्फ कोरम पूर्ति करके कार्य भी कर रहा है और मोटे पैसे को अपने जेब में रख रहा है। सीधी जिले के आदिवासी क्षेत्र का वह मामला जो पूरे प्रदेश में इन दिनों गरमाया हुआ है। जहां मंदिर ही चोरी कर ली गई थी, जिसके बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन विभाग में खींचतान मची हुई है। दोनों विभाग अपना श्रेय लेने के लिए लगातार किसी भी व्यक्ति को आरोपी बना देते हैं और किसी भी व्यक्ति को गवाह बना देते हैं अब इनमें से सही कौन है और कौन सा विभाग सही कार्य कर रहा है इस बात की जानकारी ही नहीं है।

हैरानी तो तब हुई जब वन विभाग ने कार्यवाही की और कार्यवाही करने के बाद पीओआर काटा और उन्हें कोई गवाह नहीं मिला तो अपने ही फायर बाचर और चौकीदार को गवाह बना दिया। बता दे कि रोहित लाल केवट और तेजभान सिंह वन विभाग के चौकीदार हैं। इन दोनों को वन विभाग के अधिकारियों ने गवाह बना दिया जबकि सही जानकारी यह है कि उस समय पर यह दोनों लोग मौजूद नहीं थे और ना ही इन दोनों लोगों ने कुछ देखा है। वन विभाग के कर्मचारी ना तो गांव में गए और ना ही गांव वालों से पूछने की वह जरूरत समझते हैं।

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वन विभाग का मुखबिर तंत्र उठ रहे सवाल

हर विभाग का एक अपना मुखबिर तंत्र होता है जिसके माध्यम से उसकी जानकारी उसे समय पर मिल जाती है। लेकिन वन विभाग सीधी का मुखबिर तंत्र सड़ गया है वह कोई काम लायक अब नहीं रह गया है। यह पूरा मामला 21 सितंबर का है लेकिन वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी है। 3 अक्टूबर को नवरात्रि के पहले दिन जब मीडिया कर्मियों ने इसे प्रमुखता से अपने चैनल में दिखाया था जिसके बाद पहले मौके पर पुलिस प्रशासन पहुंचा लेकिन आनन फानन में वन विभाग ने पीओआर 3 अक्टूबर को ही काट दिया। लेकिन उसमें यह दिखाया गया है कि मुखबिर से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने यह कार्य किया है। सवाल उठता है कि अगर वन विभाग का मुखबिर तंत्र मजबूत होता तो 21 तारीख की घटना को 3 अक्टूबर को कैसे मुखबिर के माध्यम से जान पाते। वन विभाग के रेंजर की तानाशाही लगातार चल रही है वह सिर्फ अपने मन मुताबिक कार्य करते हैं जहां उनके मुख्य तंत्र फेल हो चुके हैं और कार्यवाही के नाम पर वह सिर्फ कोरम पूर्ति कर रहे हैं. आप तो यहां तक लगाए गए हैं कि वह पैसे लेने के चक्कर में यह सब कार्य आनन फानन में कर रहे हैं।

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पीओआर काटने वाले को कर दिया निलंबित

कुसमी रेंजर की तानाशाही यही नहीं रुकी बल्कि एक और बड़ी घटना निकलकर सामने आई हैं जहां पीओआर काटने वाले वनरक्षक दयाराम प्रजापति को ही निलंबित कर दिया। ना तो उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया और ना ही किसी भी प्रकार का कोई भी दस्तावेज उनसे मांगा गया बल्कि तत्काल ही यह घटना 3 अक्टूबर को घटना के बाद उन्हें निलंबित कर दिया।

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जिसका नाम नहीं उसे भी कर दिया निलंबित

इस पूरे मामले में डिप्टी रेंजर आर एन शुक्ला को निलंबित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि 27 फरवरी से 30 जून तक वह अवकाश मे थे इसके बाद भी वनकर्मी कुन्नूलाल के द्वारा परिक्षेत्र अधिकारी सहायक की सील लगाकर सभी काम 29 सितम्बर तक को किया था। सारे रिकार्ड मे उनके हस्ताक्षर मिलेगे ऐसा सूत्रो का दावा है ,क्युकी वो उस समय वहा मौजूद नहीं थे। जब वह कर्मचारी वहा मौजूद नहीं थे, जब काम ही नहीं किए तो उन्हें निलंबित क्यू किया गया यह चर्चा का विषय बना हुआ है।


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