ग्राम पंचायत बंजारी भ्रष्टाचार की मिशाल बनी आखिरकार क्यों नहीं होती कार्यवाही किसका प्राप्त है संरक्षण..

रिपोर्ट – अरुण मिश्रा
सीधी l ग्राम पंचायत बंजारी में कोटे में गरीबों को अनाज के नाम पर दिया जा रहा प्लास्टिक का चावल ऐसी कई योजनाएं जैसे अवैध उत्खनन, आवास योजना, जल नल योजना, गौशाला, नाली निर्माण, तालाब निर्माण, पुलिया निर्माण, ग्राम पंचायत भवन निर्माण, स्वच्छता मिशन के तहत बने शौचालय ओडियफ एवं मनरेगा के कार्य में जंग खा रहा है कई बार जिला कलेक्टर से लेकर जनपद सीईओ तक भष्टाचार के आवेदन दिए गए लेकिन घोषखोर अधिकारी किसी प्रकार का कड़ा कदम नहीं उठाए ग्राम पंचायत क्षेत्र वर्तमान में 8 से 10 तलैया का निर्माण हुआ सिर्फ जेसीबी से मजदूर ग्राम पंचायत से प्रदेश को पलायन कर रहे मजदूरों को ग्रामपंचायत कार्य नहीं मिलता एक तरफ प्रशासन मनरेगा जैसी योजना को स्वीकृत दे रखा है कोविड-19 के वजह से मजदूर गांव से पलायन ना करें लेकिन पंचायत इंजीनियर पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सरपंच की मिलीभगत से आए दिन मशीनों से कार्य हो रहा है पूर्व में शिवसेना कार्यकर्ता प्रदीप कुमार विश्वकर्मा द्वारा कई आवेदन भी दिए गए थे। इसके बाद सूचना के तहत अधिकार भी लगाया गया था इसकी जनपद सीईओ द्वारा 2 साल तक पेसी कराया गया और 2 साल बाद पंचायत सेक्रेटरी को ₹6000 का जुर्माना सजा के रूप में कर दिया गया। इसके बाद भी ग्राम पंचायत के कर्मचारियों के ऊपर जूं तक नहीं हुई । वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन किसके द्वारा ग्राम पंचायत को भूमिहिनो को पट्टा देने की योजना चलाई गई लेकिन ग्राम पंचायत पटवारी बाल्मिक साहू द्वारा जहां भूमिहीन लोगों को पट्टा देना चाहिए ना देकर ऐसे क्षेत्र में पट्टा दिया गया की ना तो रोड है ना तो पानी और ना बिजली जबकि प्रशासन का आदेश था कि जहां मकान वहीं पर पट्टा होना चाहिए एवं जिसके पास ढाई एकड़ से कम हो उसे भी पट्टा मिलना चाहिए लेकिन पटवारी बाल्मिक साहू द्वारा जमीदारों के मिलीभगत से ऐसे लोगों को पट्टा खारिज कर दिया गया जिसके पास मात्र हिस्से में 10 डिसमिल जमीन आ रही है और घर उस पट्टे से अलग बना हुआ है । आखिर ग्राम पंचायत में पटवारी किसके लिए नियूत किया जाता है जनता के लिए या सिर्फ जमीदारों के लिए क्या सिर्फ सरकार वोट बैंक की राजनीति करती हैं आखिर ग्राम पंचायत बंजारी में बहुत से ऐसे कार्य हैं इनका टीएस पहले कर दिया गया लेकिन मौके अस्थल पर कार्य नहीं हैं मात्र कागज पर। ग्राम पंचायत बंजारीमेअधिकारियों का ख्वाब क्यों नहीं है। क्या सहायक सेक्रेटरी से लेकर जिला कलेक्टर भ्रष्टाचार में लिफ्त हैं। या दबंग सरपंचों का डर है मैं यह नहीं कहता यह तस्वीरें बयां कर रही।




