गजरा बहरा,खनुआ और बरहवा टोला में भारी तादात में जुटे फाग प्रेमी

गजरा बहरा,खनुआ और बरहवा टोला में भारी तादात में जुटे फाग प्रेमी
*दइदे बोलउआ राधे का नगर मा फगुआ से महोत्सव के सोलहवें दिन की हुई शुरुआत*
*फगुआ जोहार पारंपरिक लोक संस्कृति के संरक्षण का उत्कृष्ट माध्यम – बालमुकुंद तिवारी*
*बरहवा टोला बरगवां में फगुहारों का हुआ भव्य स्वागत*
*18 दिवसीय फगुआ जोहार के सोलहवें दिन महुआ गांव,गजरा बहरा, खनुआ और बरहवां टोला में जमा फाग का रंग*
रिपोर्ट👉 अरुण मिश्रा
सीधी-इन दिनों इन्द्रवती नाट्य समिति 18 दिवसीय फगुआ जोहार “फाग महोत्सव” को लेकर गांव-गांव पहुंच रही है जिसके माध्यम से पारंपरिक कलाओं और तीज त्यौहारों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। भारतीय संस्कृति और धरोहर ही भारत की पहचान रही है जो वर्तमान में पश्चिमी सभ्यता के आगे घुटना टेकने को मजबूर है,देश तो आजाद हुआ पर संपूर्ण आज़ादी अभी भी नहीं मिल पाई है हमारी जीवन शैली, खान पान वेश भूषा और लोक कलाएं दिनों दिन बंधक बनती जा रही हैं,नई पीढ़ी अपनी परंपरा से कोसों दूर पहुंच चुकी है अगर अब भी सचेत नहीं हुए तो अपराध और अलगाव की भावना प्रबल होती जाएगी। ऐसे में सीधी की अग्रणी नाट्य संस्था इन्द्रवती नाट्य समिति लोक कला संरक्षक का भार अपने कंधे पर लेकर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही है जो काबिले तारीफ़ है। 18 दिवसीय फगुआ जोहार “फाग महोत्सव” के सोलहवें दिन महुआ गांव, गजरा बहरा, खनुआ और बरहवा टोला में फाग का रंग जमा जहां पर भारी तादात में फाग प्रेमी जुट गए। सोलहवें दिन महोत्सव की शुरुआत दइदे बोलउआ राधे का नगर मा फाग से हुई अंतिम कार्यक्रम बरहवा टोला में रखा गया था जहां फगुहारों का भव्य स्वागत किया गया।महोत्सव की सराहना करते हुए समाजसेवी बालमुकुंद तिवारी ने कहा कि फगुआ जोहार पारंपरिक लोक संस्कृति के संरक्षण का उत्कृष्ट माध्यम साबित होगा उन्होंने यह भी कहा कि रोशनी प्रसाद मिश्र और नीरज कुंदेर लोक कला और भारतीय रंगमंच के लिए मसीहा बनकर आगे आए हैं इनकी जितनी भी तारीफ़ की जाए कम ही होगी। कार्यक्रम में बतौर अतिथि कलाकार और श्रोता दर्शक रोशनी प्रसाद मिश्र,रजनीश कुमार जयसवाल, प्रजीत कुमार साकेत,संदीप माझी, रावेंद्र सिंह, लल्लू सिंह, रामनरेश सिंह, शिवनंदन सिंह, चंद्रभान सिंह, जगन्नाथ जायसवाल, संजय सिंह, संजय कुमार घांसी, छोटेलाल घांसी, मालीकचंद घांसी,रावेंद्र,अमरजीत,बनमारी लाल घांसी, लल्लू,चंदू,रामसाय, अमृतलाल,हरिचरण, सोनेलाल,राजकुमार,दीपू,संतकुमार,रविचंद्र,ईश्वर,विजेंद्र,पुष्पराज,संजय,सत्यकुमार पटेल,बालचंद्र पटेल,रमाशंकर गिरी,चंद्रिका पनिका, जमुना सिंह,दलप्रताप सिंह, बाबूनंदन सिंह,रामदयाल पनिका,रामनरेश विश्वकर्मा,सुंदरलाल पनिका, विजय पनिका,लालबाबू विश्वकर्मा,देवेंद्र पनिका, बुद्धसागर पटेल,विजय पटेल,लक्ष्मी चंद्र पटेल,उमाशंकर पटेल,लालबहादुर पटेल, राजपाल साकेत,कैलाश साकेत,भोला प्रसाद विश्वकर्मा,चंदन प्रजापति,भीम पटेल, अरविंद्र पटेल, अम्बिका वर्मा,अमित पटेल,रामनाथ सिंह, हरिराम अगरिया,सुनील पटेल, बी एम तिवारी,रामप्रसाद तिवारी,पिंटू पाण्डेय, शशी तिवारी, दीपक त्रिपाठी,मीनू त्रिपाठी,अंजनी त्रिपाठी,राममिलन बैगा,पप्पू बैगा,भैरव लाल बैगा, रामचरित बैगा,राजमन बैगा, देवलाल बैगा,राजेंद्र विय्यार, सियाराम वियार, जयप्रसाद बैगा, वेदांती बैगा, हरी बैगा, जगलाल बैगा, बाबा बैगा, राजकुमार, बैगा, मार्कण्डेय वियर, गौतम बैगा,राजू बैगा सहित भारी तादात में लोग उपस्थित रहे।




