दो दिवसीय बाल नाट्य महोत्सव के पहले दिन कर्णभारम का हुआ अद्भुत मंचन

दो दिवसीय बाल नाट्य महोत्सव के पहले दिन कर्णभारम का हुआ अद्भुत मंचन
*कर्ण नहीं हैं लेकिन उनकी दानवीरता अमर है – विवेक सिंह*
*बाल कलाकारों के अभिनय से दर्शकों की आंखें हुईं नम*
रिपोर्ट👉 अरुण मिश्रा
सीधी l इन्द्रवती नाट्य समिति एवं यूसीएन पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में 2 दिवसीय बाल नाट्य महोत्सव का आयोजन किया गया, कार्यक्रम में अतिथि रूप में जिला प्रचारक शुभम जी, विवेक सिंह चौहान एवं अजीत केशरवानी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सूर्य पुत्र कर्ण की दानवीरता की कहानी तो सभी जानते हैं लेकिन जब कोई कहानी मंच पर प्रदर्शित होती है तो उसकी कुछ और ही बात होती है, हम बात कर रहे हैं महाकवि भास विरचित नाटक ‘कर्णभारम’ की जिसका बघेली रूपांतरण नरेंद्र सिंह ने किया और संगीत परिकल्पना एवं निर्देशन नीरज कुंदेर एवं रोशनी प्रसाद मिश्र ने किया है।नाटक में बघेली लोक संगीत की सोंधी खुशबू से सजी प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने में सफल हुई है, जिसने भारत रंग महोत्सव सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सवों में धूम मचा दिया है। इस नाटक को लेकर इन्द्रवती नाट्य समिति ने बाल कलाकारों के साथ एक प्रयोग किया जो इन दिनों काफ़ी चर्चा में है।बीती शाम UCN मास पब्लिक स्कूल के हॉल में इस नाटक को देखने बतौर अतिथि विवेक सिंह चौहान, शुभम जिला प्रचारक,अजीत केशरवानी उपस्थित रहे। कर्ण कुंती संवाद से नाटक की शुरुआत होती है और इन्द्र के द्वारा छल पूर्वक सूर्य द्वारा दिए गए कवच कुंडल मागकर कर्ण को कमजोर करने की कोशिश की जाती है पर कर्ण जानते हुए भी अपने दानवीरता को मरने नहीं देता यानि कि सूर्य द्वारा मना करने पर भी कवच कुंडल दान में दे देता है और युद्ध में अर्जुन के द्वारा मारा जाता है। बाल कलाकारों ने अपने अभिनय के जादू से दर्शकों को रोने के लिए मजबूर कर दिया और अंततोगत्वा उनकी आंखें नम हो जाती हैं।प्रस्तुति उपरांत अतिथियों ने अपने उद्बोधन में आयोजन और प्रस्तुति की खूब तारीफ़ किया, जहां एक तरफ जिला प्रचारक शुभम ने कहा कि इन्द्रवती नाट्य समिति बाल रंगमंच के माध्यम से बच्चों को ऐतिहासिक और धार्मिक संस्कृति अवगत कराते हुए सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने का काम कर रही है वहीं दूसरी तरफ़ युवा समाजसेवी विवेक सिंह ने समिति की सराहना करते हुए कहा कि कर्ण आज नहीं हैं लेकिन उनकी दानवीरता आज भी अमर है जिससे हमे प्रेरणा लेने की जरूरत है क्योंकि यही भारत की ताकत है। मंच पर दिव्यांश पाण्डेय, अभिनय कुंदेर, श्रेष्ठ सिंह, सारिका निगम, ऋचा मिश्रा, आराध्या सिंह, सूरज साहू, अथर्व सिंह, कान्हा मिश्रा, अमर विश्वकर्मा, कंचन साहू, अकांक्षा माझी, अनुभूति कुंदेर, अदिति पाण्डेय, अमृता लक्ष्मी यादव, आदित्य जायसवाल, अतुल्य सिंह, ऋषभ तिवारी, अकांक्षा साहू, जीविका सिंह, प्रखर श्रीवास्तव, समर्थ पाण्डेय, रिया मिश्रा, आर्यन सिंह, आर्यन डेहरिया, सुयश धर द्विवेदी ने अभिनय किया।मंच परे प्रकाश परिकल्पना रजनीश जायसवाल की थी तथा संगीत प्रजीत साकेत ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन सूर्य प्रकाश सिंह ने किया तथा सहयोग रुचि सिंह, काजल पाण्डेय, भूपेन्द्र पटेल, निर्भय द्विवेदी का रहा।




