संजय गांधी अस्पताल की राह पर रीवा जिले का सिरमौर अस्पताल…

संजय गांधी अस्पताल की राह पर रीवा जिले का सिरमौर अस्पताल…
मरीज के साथ उसके परिजन हो रहे परेशान…
विंध्य धरा पर जन्म लेने वाली कई पीढ़ियां अपने क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लागू होने का सपना देखती रही, लेकिन अफसोस पीढ़ियां गुजर जाने के बाद भी विंध्य धरा में संचालित सरकारी अस्पताल और सामुदायिक केंदों में योग्य चिकित्सक और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से कोसों दूर बने हुए हैं। संभागीय मुख्यालय रीवा में संचालित शासकीय संजय गांधी अस्पताल की राह पर रीवा जिले का सिरमौर अस्पताल निरंतर आगे बढ़ रहा है। जिस तरह से संजय गांधी अस्पताल यानी मरीज की जिंदगी संकट में,ठीक उसी तरह के हालात जिला सिरमौर के बन गये हैं। यहां उपचार कराने के लिए एडमिट होने वाले मरीजों के साथ साथ उनके परेशान परिजनों को यहां मजबूरी में परेशान होना पड़ता है।रीवा जिले का सिरमौर अस्पताल भी केवल मंत्री, सांसद, विधायकों के साथ साथ मरीजों के आंखों में धूल झोंकने तक सीमित रह गया है। मध्य प्रदेश शासन की मंसाओ पर पानी फेरने का काम जिला अस्पताल सिरमौर में किया जा रहा है। यही वजह है कि संजय गांधी अस्पताल को लेकर जिस तरह जनता की धारणा बदली है, ठीक उसी अंदाज में सिरमौर छेत्र का जनमानस भी अस्पताल को लेकर अपनी सोच बदल चुका है। समय के साथ सिरमौर अस्पताल का कायाकल्प कम से कम स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हो जाना चाहिए, लेकिन अफसोस मध्य प्रदेश के सत्ता वाले सिंहासन पर बैठने वालों को स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर परेशानी झेलने वाली जनता पर जरा सा भी तरस नहीं आया। सिरमौर अस्पताल में संजय गांधी अस्पताल की तरह पर्याप्त सुविधाएं न मिलने की वजह से रोज लोगों की जीवनशैली समाप्त हो रही है।
समय के साथ सिरमौर अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए सुविधाओं की मजबूती होनी चाहिए, लेकिन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रीवा का असर कहीं पर भी नजर नहीं आता है। मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करना सिरमौर अस्पताल की पहचान बन गई है। बद से बद्तर हो चुके सिरमौर अस्पताल में मरीजों और उनके परेशान परिजनों को आज भी अच्छे दिन आने का बेसब्री से इंतजार है।
वही स्थानीय सूत्रों की माने तो यहां के बीएमओ डॉक्टर प्रशांत शुक्ला कभी हॉस्पिटल में नहीं बैठते,और यहां के डॉक्टर आरके ओझा रीवा में प्रैक्टिस करते हैं,और सिरमौर अस्पताल कभी कभार ही आते है,जो की बच्चों के डॉक्टर हैं।अस्पताल सूत्रों की माने तो डॉक्टर आरके ओझा हॉस्पिटल के बगल में अपनी खुद की क्लीनिक चला रहे हैं,वह हॉस्पिटल नाम मात्र के ही आते हैं,वह पूरा समय अपनी खुद की क्लीनिक में ही देते हैं।




