मध्य प्रदेश

प्रगतिशील लेखक संघ का राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न,संविधान, लोकतंत्र, अभिव्यक्ति के आजादी का संकल्प…..

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परसाई के व्यंग्य समकालीनिता की पड़ताल हैं और वह पाठकों को मनुष्य के भीतर निरंतर पैदा हो रही विकृतियों को उद्घाटित करते हैं। इन दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिकता, जातिवाद, भाषावाद के विवाद पैदा कर मनुष्य को मनुष्य से लड़ाया जा रहा है। प्रगतिशील लेखकों का कर्तव्य है कि वह लगातार शर्मसार हो रही मानवता के संरक्षण के लिए जनसाधारण को शिक्षित दीक्षित करें। यह उद्गार हैं पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ सैयदा हमीद के, वे जबलपुर में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के 18 में राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में देश-विदेश के रचनाकारों को संबोधित कर रही थी।

डॉ सैयदा ने अपने संबोधन में आगे बताया कि उनके चाचा ख्वाजा अहमद अब्बास ने उन्हें प्रगतिशील विचारों से अवगत कराया। लिंचिंग, अलगाव ,मणिपुर पर हो रही हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा यह देश के सौहार्द पर हमला है ।सैयदा ने लेखको के राष्ट्रीय अधिवेशन से रोशन दुनिया के लिए चिंगारी पैदा होने की उम्मीद जताई। सुप्रसिद्ध रंगकर्मी तथा इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रसन्ना जी ने श्रम के महत्व पर बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र पर खतरे को देखते हुए हम सब यहां एकजुट हुए हैं। सिर्फ सोचने या अच्छी बात करने से समाज नहीं बदलेगा। कबीर, रैदास ने जो किया था हमें भी वही करना होगा। पंजाब से आई लेखिका नवशरण कौर ने कहा देश में बहुत से लोग जनवादी सोच रखने वाले हैं ।आज हम ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जब मानवता पर काले बादल छाए हुए हैं। इन्हें हटाना होगा। उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि देश में किस तरह से बुलडोजर संस्कृत पनप रही है। दमन का दौर चल रहा है।

 

क्यूबा के राजदूत मुख्य अतिथि

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उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि समाजवादी, गणतंत्र राष्ट्र के राजदूत अलेकसान्सांड्रा सीमानकास मारीन थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में प्रगतिशील लेखकों के सांप्रदायिकता तथा फासिस्ट विरोधी आंदोलन के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की। सम्मेलन में देश के 23 राज्यों के 700 से अधिक लेखको ने रचना प्रक्रिया और राष्ट्रीय समस्याओं पर गंभीर चर्चा की। अधिवेशन में उद्घाटन सत्र से लेकर लगभग हर सत्र में वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए सभी जन संगठनों व देश भर के लेखको से एकजुट होकर आम आदमी, किसान, मजदूर, महिला, अल्पसंख्यकों, दलित, आदिवासियों के हक और अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने की बात कही।

 

मणिपुर के लेखकों का दर्द

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अपने दर्जन दर साथियों के साथ मणिपुर से पहुंचे साहित्यकार इकेन खुराईजम ने मणिपुर हिंसा पर दुख व्यक्त करते हुए कहा की 2 महीने तक केंद्र सरकार ने हिंसा को लेकर कुछ नहीं बोला। हम इतने दुख और दर्द में रहे की कुछ लिख नहीं पाए। मणिपुर में मुख्य लड़ाई राजनीतिक और आर्थिक है, जिसे संप्रदायिक बना दिया गया। मैती और कुकी समुदाय सदियों से एक साथ रहते आ रहे थे, आज उन्हें एक दूसरे का जानी दुश्मन बना दिया गया। उन्होंने कहा कि हम शांति और न्याय की आवाज बुलंद करने के लिए यहां जबलपुर में अपने साथियों के साथ पहुंचे हैं। सम्मेलन में मणिपुर और नूर की हिंसा के साथ ही विभाजनकारी सोच और सांप्रदायिकता को लेकर लेखको में गंभीर चिंता देखने को मिली।

 

पाकिस्तानी लेखकों को वीजा नहीं मिला

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जबलपुर प्रख्यात लेखक हरिशंकर परसाई की जन्म व कर्मभूमि रहा है। हरिशंकर परसाई के जन्म शताब्दी पर समर्पित इस सम्मेलन का समापन उनके जन्मदिवस पर हुआ। परसाई जी की यादों और उनके विचारों को इस अधिवेशन में याद किया गया। साथ ही उनके परिवार जनों का सम्मान भी किया गया। पाकिस्तानी लेखको का प्रतिनिधिमंडल वीजा न मिलने के कारण शामिल नहीं हो सका। किंतु उन्होंने परसाई जी का छाया चित्र भेज कर भारतीय लेखकों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की।

 

सीधी के लेखकों की भागीदारी

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अधिवेशन में बेहतर दुनिया बनाने में लेखकों की भूमिका, संविधान की सुरक्षा और संवर्धन की चुनौतियां, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बरकरार रखने, देश में किसी भी तरह के अवैज्ञानिक प्रचार को प्रतिबंधित करने, नूह जैसी हिंसक घटनाएं दोबारा घटित न होने, मीडिया संस्थानों पर हमला बंद करने आदि विषयों पर गंभीर चर्चा करके अनेक प्रस्ताव पारित किए गए। चर्चा में विभिन्न राज्यों के लेखको विद्वानों ने अपना विचार व्यक्त किया। जिसमें मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर सेवाराम त्रिपाठी, पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र राजन, प्रख्यात आलोचक वीरेंद्र यादव, नरेश सक्सेना, प्रोफेसर आशीष त्रिपाठी आदि शामिल थे।

अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के इस राष्ट्रीय अधिवेशन में सीधी सिंगरौली जिला से छै रचनाकर्मियों ने हिस्सेदारी की। प्रलेस इकाई सीधी के अध्यक्ष सोमेश्वर सिंह के नेतृत्व में अरविंद त्रिपाठी, महेश पटेल, राजेंद्र दुबे, रावेन्द्र शुक्ला तथा सिंगरौली से नारायण दास विकल शामिल थे।


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