भोपाल: मेस भुगतान में कथित धोखाधड़ी, गौरव शर्मा की अग्रिम जमानत खारिज

भोपाल। श्रमोदय आवासीय विद्यालय में मेस संचालन से जुड़े भुगतान के मामले में कथित धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोपी गौरव कुमार शर्मा को अदालत से राहत नहीं मिली है। विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र की अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी। मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू), भोपाल कर रहा है।
संभागीय जनसंपर्क अधिकारी मनोज त्रिपाठी के अनुसार, मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एवं सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी प्रमोद अहिरवार ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने आरोपी की अग्रिम जमानत का विरोध किया, जिसके बाद अदालत ने प्रस्तुत तर्कों से सहमत होते हुए आवेदन खारिज कर दिया।
मेस संचालन के दौरान बनाई गई मिलते-जुलते नाम वाली फर्म
अभियोजन के अनुसार, भोपाल के श्रमोदय आवासीय विद्यालय में मेस संचालन का काम मेसर्स कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कंपनी ने गौरव कुमार शर्मा को मेस संचालन के पर्यवेक्षण और दैनिक कार्यों की देखरेख के लिए प्रबंधक नियुक्त किया था।
आरोप है कि वर्ष 2023 में गौरव शर्मा ने वास्तविक कंपनी के नाम से मिलते-जुलते नाम वाली एक अन्य फर्म, मेसर्स कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस, हर्ष मरजानी के नाम पर बनवाई। इस फर्म का बैंक खाता इंदौर के जवाहर मार्ग स्थित एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में खुलवाया गया।
कंपनी के नाम से भुगतान संबंधी पत्र देने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, 27 जून 2024 को वास्तविक कंपनी के लेटरहेड पर एक पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते के बजाय एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते में भुगतान करने की बात कही गई थी।
आरोप है कि वास्तविक कंपनी ने बैंक खाता बदलने के संबंध में ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया था। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू हुई और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, भोपाल में अपराध क्रमांक 70/2026 दर्ज किया गया।
इन धाराओं में दर्ज है मामला
प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3) और 340(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
मामले में आरोपी गौरव कुमार शर्मा ने गिरफ्तारी से पहले राहत पाने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था। अभियोजन ने इसका विरोध करते हुए अपने तर्क रखे। अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमत होकर 14 अक्टूबर को अग्रिम जमानत आवेदन निरस्त कर दिया।
फिलहाल अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया है। मामले में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।




