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सीधी को संभाग बनाने की मांग पर फिर सियासी संग्राम: शिवसेना पदाधिकारी नजरबंद, जनता की आवाज को दबाने का आरोप

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सीधी। सीधी को संभाग बनाने की मांग एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है, जब मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही शिवसेना पदाधिकारियों को नजरबंद कर दिया गया। शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे सहित कई नेताओं को सुबह 5 बजे बहरी थाने में हिरासत में लिया गया, ताकि वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात न रख सकें। इसे सत्ता के इशारे पर किया गया कदम बताया जा रहा है, जिससे स्थानीय जनता में रोष है।

 

सीधी को संभाग बनाने की मांग को लेकर शिवसेना का प्रदर्शन टला

सीधी को संभाग बनाने की मांग को लेकर शिवसेना ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की तैयारी की थी, लेकिन उससे पहले ही विवेक पांडे, जिलाध्यक्ष बेनाम सिंह बघेल उर्फ भोले, रोहित राठौर, जैनेंद्र सिंह चौहान उर्फ मुन्ना, राजन मिश्रा सहित अन्य नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। शिवसेना का आरोप है कि यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया ताकि जिले की उपेक्षा का मुद्दा सामने न आ सके।

 

सीधी को संभाग बनाने की मांग वर्षों से हो रही उपेक्षा के खिलाफ एक आवाज

 

शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने कहा कि सीधी को संभाग बनाने की मांग वर्षों से उपेक्षा का शिकार हो रहे जिले की जनता की आवाज है। कांग्रेस और भाजपा दोनों को समर्थन देने के बावजूद जिले को बेरोजगारी, शिक्षा में लूट और स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार ही मिला है। सिंगरौली को अलग कर सीधी को और भी कमजोर कर दिया गया है।

 

सीधी को संभाग बनाने की मांग के समर्थन में बड़ा जन आंदोलन संभव

 

विवेक पांडे ने चेतावनी दी कि यदि सीधी को संभाग बनाने की मांग को यूं ही अनदेखा किया गया और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज को दबाया जाता रहा, तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला पर भी तीखा हमला बोलते हुए उन्हें सीधी का विरोधी बताया। पांडे के मुताबिक शुक्ला नहीं चाहते कि सीधी संभाग बने, क्योंकि वह रीवा रियासत की राजनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं।

 

सीधी को संभाग बनाने की मांग के पीछे स्पष्ट योजना: क्षेत्रीय पुनर्गठन का सुझाव

 

विवेक पांडे ने सुझाव दिया कि यदि सीधी को संभाग बनाने की मांग को सही मायने में आगे बढ़ाना है, तो सिंगरौली और मऊगंज को सीधी में शामिल कर नया संभाग बनाया जा सकता है। वहीं, रीवा को सतना, मैहर और पन्ना के साथ अलग संभाग घोषित किया जा सकता है। यह न सिर्फ प्रशासनिक सुविधा के लिए उपयोगी होगा, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन भी स्थापित करेगा।

 


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