“गरीब आदिवासियों का जल सत्याग्रह: शिवसेना का बड़ा आंदोलन, प्रशासन की बेरुखी और पुलिस की ज्यादती उजागर”

इस घटना से जुड़ी खबर बताती है कि ललितपुर, सीधी, सिंगरौली रेल लाइन परियोजना से प्रभावित गरीब आदिवासी परिवारों को न्याय दिलाने के लिए शिवसेना ने गोपाल दास बांध में जल सत्याग्रह आंदोलन किया।
मुख्य बिंदु:
1. जल सत्याग्रह आंदोलन:
रेलवे परियोजना से प्रभावित भूमिहीन गरीब परिवार 6 महीने से अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन और कलेक्टर उनकी मांगों को सुनने को तैयार नहीं हैं।
मजबूरी में इन परिवारों ने बांध में जल सत्याग्रह करने का निर्णय लिया।

2. पुलिस की भूमिका:
बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था, लेकिन प्रदर्शनकारियों को रोकने में असफल रहा। आंदोलनकारियों ने शांतिपूर्वक विरोध दर्ज किया।
बाद में, शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे और अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की गई।
3. थाने में अभद्रता :
आंदोलन के बाद जब पीड़ित महिलाएं और लोग थाने पहुंचे, तो वहां मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों ने आदिवासी महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता की।
4. शिवसेना का आरोप :
शिवसेना ने जिला प्रशासन और कलेक्टर पर आरोप लगाया कि वे अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं और पुलिस को आगे कर गरीबों पर अत्याचार कर रहे हैं।
5. आंदोलन जारी रहेगा :
विवेक पांडे ने साफ किया कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, आंदोलन अनिश्चितकालीन आमरण अनशन के रूप में जारी रहेगा।
आंदोलन में शामिल प्रमुख लोग:
– विवेक पांडे (शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष)
– बेनाम सिंह बघेल उर्फ भोले (जिलाध्यक्ष)
– आनंद साहू, बसंत साहू समेत कई पीड़ित परिवार।
यह घटना जिला प्रशासन की संवेदनहीनता और गरीब आदिवासियों की समस्याओं के प्रति उनकी अनदेखी को उजागर करती है। आंदोलन से जुड़े लोग न्याय और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।




