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गोपाल दास बांध में जल सत्याग्रह: न्याय की चीखें और प्रशासन की खामोशी..

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गोपाल दास बांध का पानी आज किसानों और शिवसेना कार्यकर्ताओं की आंसुओं और चीखों से गूंज उठा, जब न्याय की आस में सैकड़ों लोगों ने 4 फीट गहरे पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया। भारत माता की जयकारों के साथ उनके दर्द और आक्रोश की आवाज हर दिल को झकझोर रही थी। बूढ़े चेहरे झुर्रियों के साथ पीड़ा की गवाही दे रहे थे, और आंखों के आंसू बांध के पानी में मिलकर एक कहानी बयां कर रहे थे, लेकिन प्रशासन की चुप्पी ने इस दर्द को और गहरा कर दिया।

 

यह आंदोलन उन किसानों के लिए है, जिनकी जमीन रेलवे विभाग के अधिग्रहण ने छीन ली। उनके खेतों के साथ उनकी छत भी उजाड़ दी गई। पांच महीने से ये किसान अपनी फरियाद लेकर प्रशासन के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी आवाज अनसुनी ही रही।

 

शिवसेना का समर्थन और पुलिस की कार्रवाई:

किसानों के संघर्ष में आज शिवसेना ने भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। लेकिन यह समर्थन भी पुलिस की कार्रवाई से बच नहीं सका। शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे को पुलिस ने अमानवीय तरीके से घसीटते हुए गिरफ्तार किया।

 

शिवसेना कार्यकर्ताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया और कहा, “यह सिर्फ किसानों का मामला नहीं है, यह हर उस इंसान का संघर्ष है, जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है।”

 

डीएसपी गायत्री तिवारी ने बताया कि कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें शिवसेना के पदाधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने कानून का उल्लंघन किया, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि यह उनकी आवाज दबाने की साजिश है।

 

प्रशासन कब सुनेगा किसानों की चीखें?

 

गोपाल दास बांध में जल सत्याग्रह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों की पीड़ा का प्रतीक था, जिनसे उनकी जमीन और घर छीन लिए गए। यह सवाल आज हर दिल में गूंज रहा है—क्या प्रशासन इन किसानों की चीखों को सुनेगा, या यह संघर्ष सिर्फ पानी के बुलबुले बनकर रह जाएगा?

 

गोपाल दास बांध का पानी न्याय की उम्मीद लिए आज भी बह रहा है, लेकिन यह देखना बाकी है कि प्रशासन कब इस दर्द को समझेगा।


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