कमर्जी धान खरीदी केन्द्र के साथ वेयर हाउस में मनमान

सीधी। खरीदी केन्द्र प्रभारियों की मनमानी से जहां किसानों की सांसे तो अटक ही गई है वहीं अब जो कम भीगी हुई धान है उनको खरीदी केन्द्र प्रभारियों द्वारा वेयर हाउसों के संचालकों से सांठ-गांठ करके आधी भीगी हुई धानों मिलाकर भंडारित करने का भी प्रयास किया जा रहा है। उक्त कृत्य के चलते जहां शासन को जमकर चूना लगाने का खेल भी खरीदी केन्द्र प्रभारियों व वेयर हाउस संचालकों नेमिलकर बना लिया है। बता दें कि धान उपार्जन्द्र केंद्र में रखरखाव के लिए बजट भी आया है लेकिन यह जानते हुए की बरसात हो सकती है प्रबंधन के द्वारा आए बजट को डकार जाने की नीयत से व्यवस्था नहीं कीगई उसके पीछे दो वजह है एक तो अगर धान बोरी में भरकर वजन कर दी गई तो पहले बजन में ही निर्धारित मात्रा से ज्यादा का भराव किया गया अब ऐसे में अगर धान की बोरियों में पानी पड़ेगा तो उसका भजन और काफी बढ़ जाएगा जिसका फायदा खरीदी केंद्र को होगा क्योंकि बोरियों में पानी पड़ने से वजन बढ़ना तय है लेकिन किसान के लिए यही बरसात घातक सिद्ध हो सकता है क्योंकि जब तक धान का परिवहन यानी उठाव और भंडारण नहीं हो जाता है तब तक धान का भुगतान नहीं होगा। ऐसे में बरसात के कारण धान का उठाव और भंडारण का प्रभावित होना तय है जिससे किसान का भुगतान अधर में लटक सकता है।
2 जनवरी से शुरू होगी खरीदी
खराब मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा धान खरीदी तीन के लिए स्थगित कर दी गई है। साथ ही बताया गया कि 30,31 एवं 1 जनवरी को धान खरीदी स्थगित रहेगी, वहीं धान खरीदी की अंतिम तिथि 20 जनवरी से बढ़ाकर 23 जनवरी कर दी गई है साथ ही जिन किसानों द्वारा स्लाट बुक कराया गया था उसकी अवधि भी पांच दिन की बढ़ा दी गई है उन्हे नया स्लाट बुक करने की जरूरत नही है।
इन केन्द्रों में ज्यादा मनमानी
बताया गया कि धान खरीदी केन्द्र कमर्जी धान खरीदी केन्द्र में जमकर मनमानी की जा रही है। यहां बताया गया कि 42 किलो की खरीदी किसानों से की जा रही है। जबकि बोरे में 40 किलो के साथ बोरे के वजन की भर्ती की जानी है बावजूद इसके यहां जमकर मनमानी की जा रही है लेकिन इनकी मनमानियों पर लगाम लगाने की जरूरत नही समझी जा रही है। इनके कृत्यों का विरोध किसानों द्वारा किया जाता है लेकिन धान की खरीदी न करने का दबाव बनाकर उनका मुंह बंद करा दिया जाता है। साथ ही बताया गया कि यहां स्थित वेयर हाउस संचालक द्वारा भी जमकर मनमानी की जा रही है।




