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शहर से लेकर गांव-गांव तक जारी है पैकारी*

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*शहर से लेकर गांव-गांव तक जारी है पैकारी*

 

सुविधा शुल्क लेकर मनमानी करने की प्रदान की गई है छूट-आबकारी अधिकारियों हठधर्मिता से मालामाल हो रहे ठेकेदार

 

 

सीधी| जिला मुख्यालय के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। जिन ठेकेदारों को अंग्रेजी और देशी कम्पोजिट शराब दुकान का ठेका दिया गया है वहीं अधिक से अधिक लाभ कमाने के लिए शराब के अवैध कारोबार को अंजाम देने में महती भूमिका निभाते हैं। शहर से लेकर गांव-गांव तक शराब ब की अवैध बिक्री जिले के अंदर एक गंभीर समस्या बन गई है। इसके बाद भी आबकारी विभाग इस कारोबार पर नकेल कसने में कामयाब नहीं हो रहा है। शहर के अलग-अलग स्थानों पर लायसेंसी दुकानें संचालित होने के बाद भी धड़ल्ले से रिहायसी मुहल्लों में अवैध शराब बेचने का धंधा जोरो पर चल रहा है। जिसके कारण कालोनियों में रहने वाले लोगों के लिए नशेड़ी एक बड़ी समस्या चनते हैं और आए दिन विवाद की घटनाएं सामने आती रहती हैं। शहर से कहीं अधिक बुरी स्थित्ति जिले के ग्रामीण अंचल की हो चुकी है। गांव-गांव में अवैध शराब पैकारी करने वालों का हुजूम सक्रिय रहता है। लायसेंसी दुकानों से ही अवैध कारोबार करने वाले लोगों को शराब उपलब्ध कराई जाती है। जिला आबकारी विभाग के संरक्षण में लायसेंसी ठेकेदारों की बल्ले-बल्ले जिले में हो रही है। तीन दर्जन मिले हुए है लायसेंस / जिला मुख्यालय में अंग्रेजी-देशी कम्पोजिट शराब की कुल 34 दुकानें संचालित हो रही हैं। जिन स्थानों पर इन दुकानों का संचालन किया जाता है उसके आसपास अवैध शराब का कारोबार तेजी से फैल रहा है। जिला आबकारी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शहर के बस स्टैण्ड, सीधी क्रमांक 2, सीधीक्रमांक 3, सीधी क्रमाक 1, अस्पताल चौक में लायसेंसी शराब दुकान संचालित हो रही हैं। इसी तरह से जिले के कुचवाही, रामपुर, रामपुर नैकिन, चकड़ौर चुरहट में दो दुकानें, मोहनिया, बहरी में दो दुकानें, कुबरी, अमिलिया में दो दुकानें, पटपरा, हटवा, पटपरा सी, बुढगौना में दो दुकानें, अमलई,कुसमी, मड़वास, डोल, सिहावल में दो, हिनौती, मझौली में दो, सेमरिया, बढ़ौरा और रामगढ़ में लायसेंसी शराब दुकान संचालित हो रही है। इन सभी दुकानों को चलाने वाले ठेकेदारों के संरक्षण में ही अवैध शराब का कारोबार पूरे सीधी जिले में बदस्तूर किया जा रहा है।

 

*मुख्यमंत्री की मंशा पर पानी फेर रहे आबकारी अधिकारी*

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए निर्देशित कर चुके हैं, इसके बाद भी जिला आबकारी विभाग अवैध शराब के कारोबार को लेकर औपचारिकता तक सीमित रहती है। है। यदा-कदा आबकारी विभाग अवैध शराब को पकड़ने की छोटी मोटी कार्यवाही कर कागजी खानापूर्ति को अंजाम देती है। आबकारी विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में अभी तक अवैध शराब के खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं की गई है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के अवैध शराब का कारोबार करने वाले कारोबारियों को संरक्षण देने का काम करती है। जिसके एवज में उन्हें हर महीने नजराना मिलता है। यही वजह है कि शहर से लेकर जिले के दूरस्थ इलाको तक अवैध शराब का कारोबार फैलता जा रहा।


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