“सरकार की अनदेखी: किशोरों को नशे की ओर धकेल रहे चाय कैफे!”

सीधी:- शासन बच्चों को नशे से दूर करने की तमाम कोशिशें कर रहा है। मासूमों को नशीली वस्तुएं मुहैया कराने वालों पर भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई के निर्देश हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी को कार्रवाई से परहेज है। नतीजा ये है कि कम उम्र के बच्चों और छात्र-छात्राओं में सिगरेट जैसे सस्ते नशे की लत बढ़ती जा रही है। चाय-काफी की दुकानें चलाने वाले बेरोकटोक नाबालिगों को सिगरेट बेचने के साथ उन्हें पीने के लिए बैठने भी दे रहे हैं।
बच्चों का भविष्य सिगरेट के धुएं में सुलग रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि बच्चों का भविष्य खराब करने वाले इन दानवों पर आखिर कब कार्रवाई होगी? एक इस प्रकार की तस्वीर सोशल मीडिया मे वायरल हो रही हैं।जो कि शहरी क्षेत्र के एक चाय कैफे की बताई जा रही हैं।
जहां कैफे संचालक सिगरेट के धुएं में स्कूल के बच्चों का बचपन सुलगा रहा है। वह कैफे में आने वाले स्कूली छात्र-छात्राओं को सिगरेट बेच ही नहीं रहा, बल्कि बैठकर पीने भी दे रहा है। शहर के छत्रसाल स्टेडियम मार्ग में संचालित कैफे मे बीते दिनों कोतवाली पुलिस ने दविश देकर बच्चों के पिता को भी मौके पर बुलाकर बच्चों की करतूतों से अवगत कराया था। फोटो में साफ तौर पर दिख खा है कि कैफे में स्कूल बैग लिए और यूनिफॉर्म पहने आई एक 12-13 वर्षीय छात्रा कैफे में बैठकर सिगरेट पीकर धुआं उड़ा रही है। वहीं दूसरी फोटो में एक स्कूली छात्र भी दिखाई दे रहा है।

डॉक्टर की राय
जिला अस्पताल में पदस्थ मनोचिकित्सक डॉ रवि पटेल ने बताया कि किशोरों में धूम्रपान की आदत उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रभाव डाल सकती है। यह न केवल फेफड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि अन्य गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है।किशोरावस्था में धूम्रपान करने वाले बच्चे आगे भी भी नशे के आदी बन सकते हैं।
अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और सरकार को होना होगा जागरूक (ए आर न्यूज लाइव)
इस घटना ने एक बार फिर अभिभावकों की लापरवाही को उजागर किया है। बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें सही मार्गदर्शन देना बेहद जरुरी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरुक करे और उन्हें सही रास्ता दिलाएं, साथ ही शिक्षण संस्थानों में भी इस पर जागरुकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करें और किशोरों को नशे से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाएं।
यह है कानून (ए आर न्यूज लाइव)
कोटपा एक्ट की धारा 4 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। दंड का भी प्रावधान है। खास बात यह कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास चाय,गुटखा की दुकानें 100 मीटर के दायरे में नहीं होनी चाहिए। इन स्थानों के आसपास सिंगरेट और गुटखा, तंबाकू नहीं बेची जा सकती। इसके बावजूद बड़ल्ले से नावालिग बच्चों को ही धूम्रपान की सामग्री बेची जा रही। ऐसी सभी जगह पर धूम्रपान निषेध का बोर्ड भी लगाया जाना चाहिए।
दोनों छात्र कैफे पर बैग टांगकर आए थे और संचालक ने उनके नाबालिग होने और स्कूल यूनिफॉर्म में होने पर भी उन्हें न टोकते हुए उनकी मनचाही सिगरेट और चाय दी। दोनों काउंटर के सामने ही कुर्सी पर बैठकर सिगरेट फूंकने लगे। इस दौरान कैफे में कई युवक भी मौजूद थे,जो कैफे में बैठकर सिगरेट के छल्ले उड़ा रहे थे।
कैफे मे बैठे दोनों स्कूली नाबालिग बेखौफ होकर सिगरेट पी रहे थे। नाबालिग छात्रा ने तो एक सिगरेट खत्म होने के बाद दूसरी भी फूंक डाली। हम भी दोस्तों के साथ बैठे थे, जब हमने उन्हें टोका तो बोले की कैफे वाले को दिक्कत नहीं है तो आपको क्या?हमने दोबारा उसके पास जाने ही हिम्मत नहीं की।हालांकि गलती कैफे संचालक की ही थी।




