अवयस्क अभियोक्त्री को बहला फुसलाकर ले जाने एवं उसके साथ बलात्कार करने के आरोपी को आजीवन कठोर कारावास एवं बीस हजार रू. अर्थदण्ड की सजा:

अवयस्क अभियोक्त्री को बहला फुसलाकर ले जाने एवं उसके साथ बलात्कार करने के आरोपी को आजीवन कठोर कारावास एवं बीस हजार रू. अर्थदण्ड की सजा:
मीडिया सेल प्रभारी कु. सीनू वर्मा द्वारा बताया गया कि फरियादिया उम्र 17 वर्ष अंतर्गत थाना चुरहट जिला सीधी हमराह अपनी बडी बहन के थाना दिनांक 07/03/2021 को थाना उपस्थित आकर रिपोर्ट दर्ज करायी कि वह अपने पिता के साथ घर मे अकेली रहती है, उसकी मॉ बाहर मजदूरी करने गई है। उसके गाव का बबलू उर्फ कैलाश साहू बोला कि चलो बाहर मजदूरी करने चलते है कपडा खाना पीना और 4000रू मिलेंगे। दिनांक 02/03/2021 को दोपहर करीबन 2.30 बजे बिना किसी को बताये वह अकेले ही घर से निकली और बबलू साहू के साथ सागर पहुची, जहां करीब 1.30 बजे रात्रि बबलू साहू के साथ रिश्तेदारी मे पथरिया गयी। वहां बबलू साहू ने उसे डरा धमका कर उसके साथ गलत काम (बलात्कार) किया। फिर दूसरे दिन 03/03/2021 को दिन भर वहीं रही, शाम को ट्रेन से रीवा आ गई, फिर बस से घर आ गई। डर के कारण घटना के बारे में किसी को नही बताई। फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना चुरहट में अपराध क्र. 176/21 अंतर्गत धारा 363, 376(1), 506 भादवि, 3(1)(डब्ल्यू) (आई), 3(2-वी) एससीएसटी एक्ट, ¾ पॉक्सो एक्ट पंजीबद्ध किया गया। प्रकरण में विवेचना उपरांत अभियोग पत्र तैयार किया जाकर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसके न्यायालयीन सत्र प्रकरण क्रमांक 21/21 में शासन की ओर से सशक्त पैरवी करते हुए जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती भारती शर्मा द्वारा अभियुक्त को संदेह से परे प्रमाणित कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप माननीय विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) सीधी की न्यायालय के द्वारा आरोपी कैलाश उर्फ बबलू साहू तनय रामफल साहू उम्र 34 वर्ष को धारा 366 भादवि में 10 वर्ष का कठोर कारावास व पॉच हजार रूपये अर्थदण्ड, धारा 506 भाग 2 भादवि में 06 माह का कठोर कारावास, पॉक्सो एक्ट की धारा 3 सहपठित धारा 4(1) के आरोप में आजीवन कठोर कारावास एवं 5,000/- रू. अर्थदण्ड एवं एससीएसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) एवं 3(1)(डब्ल्यू)(आई) में आजीवन कठोर कारावास एवं पॉच-पॉच हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा से दण्डित किया गया। प्रकरण के शीघ्र निराकरण में कोर्ट मोहर्रिर श्री धर्मेन्द्र सिंह, आर. 519 द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान करते हुए साक्षियों को समय-समय पर संमंस /वारण्ट जारी कर माननीय न्यायालय के समक्ष आहूत कराया गया।




