भोपाल: पैरोल पर जेल से बाहर आया कैदी नहीं लौटा, अदालत ने सुनाई 2 साल की सजा

भोपाल। 16 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद वापस नहीं लौटने वाले कैदी गब्बर उर्फ मनोहर को अदालत ने दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जयदीप मौर्य की अदालत ने 12 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। आरोपी पहले से ही एक मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा था।
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी गुंजन गुप्ता ने बताया कि मामले में शासन की ओर से अभियोजन पक्ष ने पैरवी की। अदालत ने प्रस्तुत दस्तावेजों, साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद आरोपी को भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 224 के तहत दोषी ठहराया।
16 दिन की पैरोल पर आया था बाहर
अभियोजन के अनुसार, गब्बर उर्फ मनोहर पुत्र शिवचरण, निवासी विदिशा, बंदी क्रमांक 2849/22 के रूप में जेल में निरुद्ध था। उसे विदिशा की विशेष अदालत द्वारा एक सत्र प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, मध्यप्रदेश के 17 मई 2023 के आदेश के अनुसार आरोपी को 20 सितंबर 2023 को 16 दिनों की आपात पैरोल पर रिहा किया गया था। पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद उसे 5 अक्टूबर 2023 को जेल वापस लौटना था, लेकिन वह निर्धारित समय पर वापस नहीं पहुंचा।
जेल प्रहरी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
आरोपी के जेल नहीं लौटने पर 5 अक्टूबर 2023 को जेल प्रहरी ने भोपाल के गांधी नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 258/2023 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 224 में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने अभियोग पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए।
अदालत ने सुनाई दो साल की सजा
मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए अदालत ने गब्बर उर्फ मनोहर को दोषी करार दिया। न्यायालय ने उसे धारा 224 भादवि के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
प्रकरण में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी गुंजन गुप्ता ने पैरवी की।




