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अवयस्‍क अभियोक्‍त्री का व्‍यपहर कर दुष्‍कर्म के आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास

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अवयस्‍क अभियोक्‍त्री का व्‍यपहर कर दुष्‍कर्म के आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास

बताया गया दिनांक 16.12.2020 को सुबह 10:00 बजे अवयस्क अभियोक्त्री पढ़ने के लिए स्कूल गई थी। जब स्कूल से वापस नहीं आयी तो उसके स्कूल तथा आसपास के क्षेत्र में तलाश किया गया लेकिन अभियोक्त्री का कहीं पता नहीं चला तब अभियोक्त्री के पिता ने थाना कुसमी में अवयस्क अभियोक्त्री को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला फुसलाकर भगाकर ले जाने के संबंध में रिपोर्ट लिखायी, जिसके आधार पर थाना कुसमी में अज्ञात के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट अपराध क्रमांक 209/2020 दिनांक 17.12.2020 अंतर्गत धारा 363 भा.दं.सं. पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान अभियोक्त्री दिनांक 27.01.2021 को मड़वास रेलवे स्टेशन के पास दस्तयाब हुई। अभियोक्त्री के बयान लेखबद्ध किये गये जिसमें अभियोक्‍त्री ने बताया कि आरोपी जो उसका नातेदार है, ने दिनांक 16.12.2020 को समय करीबन 10:00 बजे से 01:00 बजे के मध्य, स्थान आरक्षी केन्द्र कुसमी जिला-सीधी, अन्तर्गत से अवयस्क अभियोक्त्री को किसी को बताये बिना गुजरात ले गया एवं उसे गुजरात राज्य में स्थित एक कमरे में 10 या उससे अधिक दिनों तक बंद करके उसके साथ बार-बार बलात्संग किया, जिसके फलस्वरूप अवयस्क अभियोक्त्री गर्भवती हो गई। घटना की सूचना पर पुलिस थाना कुसमी में अपराध क्रमांक 209/2020 अंतर्गत धारा 363,342, 354(क), 365, 367, 376(1), 376(2)(एन), 376(2)(च) भादवि एवं धारा 5,6,7,8 पॉक्‍सो एक्‍ट पंजीबद्ध कर विवेचना पश्‍चात् अभियोग पत्र तैयार कर माननीय न्‍यायालय सीधी में प्रस्तुत किया गया, जिसके न्यायालयीन विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 47/2021 में शासन की ओर से सशक्‍त पैरवी करते हुए सहायक निदेशक, अभियोजन (जिला अभियोजन अधिकारी) श्री राजकुमार रावत के द्वारा अभियुक्त को संदेह से परे प्रमाणित कराया गया, जिसके परिणामस्‍वरूप माननीय विशेष न्‍यायाधीश (पॉक्‍सो एक्‍ट) सीधी के द्वारा अभियुक्‍त को धारा 366, 344 भादवि एवं धारा 8, 5(एल)/6, 5(एन)/6, 5(जे)(आई.आई.)/6 पॉक्‍सो एक्‍ट में दोषसिद्ध करते हुए कुल बीस वर्ष के सश्रम कारावास एवं 20,000/- रूपये के अर्थदंड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड की धनराशि रूपये 20,000/- रूपये (बीस हजार रूपये मात्र) अभियोक्त्री को धारा 357(1)(बी) द.प्र.स. के प्रावधानों के अनुसार अपील अवधि

पश्चात अपील न होने की स्थिति में अभियोक्त्री को क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान किये जाने का भी आदेश पारित किया गया।

 

 

 


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