एनएच-39 बना विकास की राह या विफलता का प्रतीक? शिवसेना ने सरकार और जनप्रतिनिधियों को घेरा

सीधी/सिंगरौली। एनएच-39 पर पिछले 15 वर्षों से अधूरा निर्माण कार्य और बार-बार रद्द हो रहे टेंडर अब आम जनता की सहनशक्ति की परीक्षा ले रहे हैं। शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने इस मामले में सरकार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और निर्माण एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह मार्ग अब विकास का उदाहरण नहीं, बल्कि फर्जी राजनीति और लापरवाही की मिसाल बन चुका है।
एनएच-39 पर फर्जी राजनीति का आरोप
एनएच-39 के आधे-अधूरे निर्माण को लेकर विवेक पांडे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 15 साल से इस सड़क के नाम पर केवल झूठे वादे किए गए हैं। नतीजा यह है कि आम जनता आज भी मूलभूत सड़क सुविधा के लिए तरस रही है। उनका आरोप है कि प्रशासन और सरकारों की निष्क्रियता इस दुर्दशा की मुख्य वजह है।
एनएच-39 बना मज़ाक का विषय, दूसरी बार टेंडर रद्द
एनएच-39 को लेकर एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इसका टेंडर लगातार दूसरी बार रद्द किया गया है। विवेक पांडे ने कहा कि यह दिखाता है कि सरकार और संबंधित विभाग इस कार्य को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है जैसे टेंडर प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।”
एनएच-39 पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल
एनएच-39 की स्थिति को लेकर शिवसेना नेता ने स्थानीय सांसद और विधायकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की राजनीति केवल सोशल मीडिया फोटो और पोस्ट तक सीमित है। जमीन पर कोई ठोस कार्य होता नजर नहीं आता, केवल घोषणाओं और दावों का खेल चल रहा है।
एनएच-39 को लेकर शिवसेना करेगी जन आंदोलन
एनएच-39 के मुद्दे पर शिवसेना अब मैदान में उतरने को तैयार है। विवेक पांडे ने चेतावनी दी कि अगर इस मार्ग का कार्य शीघ्रता से और पारदर्शी तरीके से शुरू नहीं हुआ, तो चरणबद्ध जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि इस परियोजना की जिम्मेदारी किसी स्वतंत्र एजेंसी को दी जाए और कार्य की सार्वजनिक निगरानी सुनिश्चित की जाए।




