सीधी

मर्चुरी में नही है शवों को रखने की व्यवस्था

बिजली की अव्यवस्था से खराब पड़े हैं डी-फ्रीजर

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सीधी। सरकारी स्वास्थ्य इंतजामों की कमी से जूझते सीधी जिला में जिंदा तो जिंदा मुर्दा की भी खूब फजीहत होती है। चौंकाने वाली बात तो यह कि जिला मुख्यालय सीधी में संचालित मर्चुरी हाउस की जहां हर कदम कदम पर अव्यवस्थाओं का शिकार होकर मृतकों के परिजन सिर्फ परेशान होने को मजबूर रहते है। यहां की इस अव्यवस्था के आगे क्षेत्र का हर आम खास सिर्फ लाचार और बेबस होकर रह जाता है। आलम यह है कि यहां की मर्चुरी मे शवों को कुछ घंटों तक सुरक्षित ढंग से रखने के लिए नाम के दो फ्रीजर तो है लेकिन ये फ्रीजर काफी लंबे समय से बंद पडे है। बताया जाता है कि इन फ्रीजर मे शवों को रखना खतरे से खाली नहीं रहता। क्योंकि इनमें शवों को सुरक्षित करने के लायक तापमान ही नहीं बन पाता है। इसके अलावा भी यहां अन्य कई ऐसी छोटी-बड़ी अव्यवस्थाएं उफान पर बनी हुई हैं। बीतते समय के साथ यहां की अव्यवस्थाएं पहले से ज्यादा बढ़ती जा रही हैं। इसके बाद भी न तो स्वास्थ्य महकमा और न ही जिला प्रशासन यहां की जरुरतों को लेकर कोई ध्यान देता है। वहीं जिला मुख्यालय में अव्यवस्थित पड़े पीएम हाउस से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिलेभर में बनाए गए पीएम हाउस के क्या हालात होगें।

 

जिला अस्पताल के इस पीएम हाउस में कोतवाली क्षेत्र से लेकर जमोड़ी,कमर्जी, समेत आसपास के तमाम क्षेत्र के शव तो आते ही हैं। साथ ही मुख्यालय होने के कारण कई बार संवेदनशील केश में भी शवों को पीएम यहां कराना पड़ता है लेकिन ऐसी जरूरत की के बाद भी यहां शवों को रखने के लिए आज तक फ्रीजर के व्यवस्थित इंतजाम नहीं हो सके हैं। इस पीएम हाउस में बिजली सप्लाई व्यवस्था को भी लडखड़ा, साल भर से ज्यादा का समय होने को है लेकिन इसे दुरस्त कराने न तो अस्पताल प्रबंधन और न ही बिजली महकमा कोई रुचि दिखाता है नतीजा यहां अक्सर पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर को जब रोशनी की जरूरत पड़ती है तो मजबूरी में मोबाइल के टार्च की रोशनी से काम करना पड़ता है जबकि कायदे से यहां बिजली सप्लाई की सुचारू व्यवस्था के साथ बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था भी होनी चाहिए।

 

पोस्टमार्टम हाउस में क्या-क्या होना चाहिए

 

बताया जाता है कि नियम तो यह है कि प्रत्येक पोस्टमार्टम हाउस में शवों को रखने की पर्याप्त सुविधा होनी चाहिए शव परीक्षा करने वाले डॉक्टर फॉरेंसिक लैब से लेकर टेक्नीशियन कंप्यूटर इमेजिंग कक्ष शौचालय बैठने की जगह समेत अन्य आवश्यक इंतजाम होने चाहिए लेकिन जिला मुख्यालय सीधी के पोस्टमार्टम हाउस में तो हालात इसके विपरीत वाले ही बने हुए हैं। पीएम हाउस में रोजाना औसतन 2 से 3 शवो का पीएम होता है सभी पीएम में सुई धागा समेत अन्य जो भी आवश्यक सामग्रियों की जरूरत पड़ती है उसे मृतक के परिजनों को बाहर से खरीद कर ही लाना पड़ता है जब यह इंतजाम पीएम हाउस में पहले से ही होने चाहिए।

 

यहां पीएम हाउस है पर नहीं हो रहा पीएम

 

बताया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है जहां कुछ क्षेत्र में पीएम हाउस बना है वहां डॉक्टर भी है लेकिन पीएम के लिए आवश्यक सहायक सफाई कर्मी की सुविधा नहीं होने से डॉक्टर पीएम नहीं करते हैं नतीजा इन सभी का बोझ सीधे जिला पीएम हाउस पर पड़ता है।


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