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जिसे फाइनल में हराया, उसी को जिताई ट्रॉफी, जानिए कौन है गोल्डन डक से गोल्डन पंच वाला ये ‘रॉकस्टार’?

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नई दिल्‍ली. एक खिलाड़ी क्रिकेट के अलग-अलग फॉर्मेट वाली कितनी पिचों पर अपना जलवा बिखेर सकता है? कितनी बार अपने खेलने के अंदाज से फैंस का प्यारा बना रह सकता है? कितनी बार हारी बाजी को जीतना जिसे आता है और ऐन मौके पर सिंकदर कहलाता है?

 

  • यह तलाश जिस जवाब पर ठहरेगी, उसे सर रवींद्र जडेजा कहते हैं.

 

आईपीएल 2023 में रवींद्र जडेजा ने ना शतक जमाया, ना पचासा मारा और ना ही विकेटों की झड़ी लगाई. फिर भी चेन्‍नई सुपर किंग्‍स के फैंस के साथ ही क्रिकेट के सभी दीवानों का सिर आज उनके सामने झुका है. 2008 में आईपीएल के पहले सीजन में जड्डू राजस्थान रॉयल्स की खोज थे. ऐसी टीम जिसने बड़े सुपरस्टार खिलाड़ी ना होने के बावजूद शेन वॉर्न की अगुवाई में पहला खिताब अपने नाम किया था. दिलचस्‍प बात यह है कि फाइनल में राजस्थान रॉयल्स का सामना उसी चेन्नई सुपर किंग्स से हुआ था, जिसके साथ रवींद्र जडेजा पिछले 11 साल से अटूट बंधन में बंधे हैं.

 

तब चेन्‍नई सुपर किंग्‍स ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 163 रन बनाए थे. राजस्थान ने 20वें ओवर की आखिरी गेंद पर 164 रन बना लिए और सीएसके आईपीएल का पहला फाइनल और ट्रॉफी हार गई थी. इस टूर्नामेंट में ही शेन वॉर्न ने रवींद्र जडेजा को रॉकस्टार का खिताब दिया था. खास बात यह रही कि फाइनल में जडेजा को गेंदबाजी नहीं दी गई थी. जडेजा ने मैच में कोई कैच नहीं पकड़ा और ना ही रनआउट किया.

बल्लेबाजी में भी जडेजा अपने पहले आईपीएल के पहले फाइनल में पहली गेंद पर ही कैच आउट हो गोल्डन डक बने. साल 2012 में चेन्‍नई सुपर किंग्‍स ने रवींद्र जडेजा को 9.8 करोड़ की हाहाकारी डील में खरीद लिया. यह उस सीजन की सबसे बड़ी नीलामी बोली थी. पहले फाइनल में गोल्डन डक हुए जडेजा ने मंडे को हुए मेगा मुकाबले में आईपीएल 2023 का आखिरी छक्का और चौका जड़कर सीएसके को मुंबई इंडियंस के बराबर रिकॉर्ड पांचवी बार फाइनल जीताकर ट्रॉफी का गोल्डन पंच लगवाया.


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