“न्यायालय का सख्त फैसला: मां ने की नवजात की हत्या, मिली आजीवन सजा”

न्यायालय द्वारा मां को उसकी नवजात बेटी की निर्मम हत्या के मामले में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह दिल दहला देने वाला मामला मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले का है, जहां बेटी की चाह न होने के कारण मां ने अपने ही हाथों नवजात को मौत के घाट उतार दिया। माननीय षष्ठम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपीया मंजू बाई को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और ₹500 का अर्थदंड, साथ ही धारा 201 के अंतर्गत 5 वर्ष का कठोर कारावास और ₹500 का अतिरिक्त अर्थदंड सुनाया।
न्यायालय ने पेश की सख्त मिसाल
न्यायालय में इस जघन्य अपराध के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य और तथ्य प्रस्तुत किए। अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री रमेश सोलंकी ने बताया कि यह मामला वर्ष 2020 में सामने आया था, जब मंजू बाई ने जिला अस्पताल में एक स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। बाद में उसने अपनी बच्ची को गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल लाकर यह दावा किया कि चोटों की जानकारी नहीं है।
न्यायालय में उजागर हुई मां की क्रूरता
जांच में सामने आया कि मां मंजू बाई ने नवजात बालिका के शरीर पर कई गंभीर चोटें पहुंचाई थीं। बालिका के सीने में गहरे घाव, गले पर कटने के निशान और पेट से बाहर निकली आंतें देखकर डॉक्टर स्तब्ध रह गए। बालिका को तत्काल इंदौर रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
न्यायालय में अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी
थाना मोहन बड़ोदिया द्वारा मामले में अपराध दर्ज कर सघन जांच की गई। उपसंचालक सुश्री प्रेमलता सोलंकी और श्री रमेश सोलंकी ने अदालत में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित किया कि बच्ची की हत्या मां द्वारा ही की गई थी। अभियोजन की सशक्त दलीलों से सहमत होकर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायालय का संदेश: बेटियों की हत्या अब बर्दाश्त नहीं
न्यायालय का यह फैसला समाज में बेटियों के प्रति अपराध करने वालों के लिए चेतावनी है। बेटियों की हत्या जैसे घृणित कृत्य पर सख्त दंड देकर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कोई भी नरमी नहीं बरती जाएगी।




